राज्यपाल की सहमति से बन गया सबसे बड़ा कानून, जिसका आप सभी को था इंतज़ार, नहीं चलेगी अब दादागिरी

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एक वक़्त वो भी था जब स्कूल शिक्षा का मंदिर हुआ करते थे लेकिन आज कल तो प्राइवेट स्कूल ने शिक्षा को धंधा बना के रख दिया है. आम गरीब आदमी तो अपने बच्चों को गलती सभी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के बारे में सोच भी नहीं सकता. जो माध्यम वर्गीय पढ़ा रहे हैं वे इन स्कूलों के भरी भरकम फीस और अनाप-शनाप खर्च के बोझ जे तले दबे जा रहे हैं. ऐसे में अब यूपी में योगी सरकार ने प्राइवेट स्कूलों पर कड़ी नकेल कसी है.

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक यूपी में आज अभिभावकों को योगी सरकार ने बड़ी राहत दी है. यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार (09 अप्रैल) शाम को फीस नियंत्रण अध्यादेश- 2018 को मंजूरी दे दी है. जिसके बाद अब प्राइवेट स्कूलों की दादागिरी नहीं चलेगी अब न तो निजी स्कूल मनमानी फीस वसूल सकेंगे और न ही 5 साल से पहले यूनिफॉर्म बदल सकेंगे.

नए नियम उन सभी प्राइवेट स्कूलों पर लागू होंगे जो सालाना 20 हजार रुपए से ज्यादा फीस वसूलते हैं.राज्यपाल की मंजूरी के बाद प्रमुख सचिव (विधायी) वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी. अब अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश में फीस नियंत्रण कानून प्रभावी हो गया है.

मनमानी फीस वसूलने पर लगेगी लगाम

सरकार के अध्यादेश के मुताबिक, निजी स्कूल वार्षिक फीस में 5 फीसदी से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकेंगे. स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर अनिवार्य रूप से वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा. वहीं, स्कूल अब एडमिशन फीस सिर्फ एक बार ही वसूल सकेंगे. फीस निर्धारण के लिए 2015-16 को आधार वर्ष माना जाएगा.

फीस पर मनमानी रोकने के लिए इसे दो स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे. पहले भाग में संभावित शुल्क होगा, जिसमें पंजीकरण, प्रवेश, परीक्षा और संयुक्त वार्षिक शुल्क शामिल होगा. इसके अलावा वैकल्पिक शुल्क में बस का किराया, बोर्डिंग, मेस, डाइनिंग, शैक्षणिक भ्रमण और अन्य फीस शामिल होगी. ये सभी शुल्क तभी लिए जा सकेंगे जब, छात्र इन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहा होगा.

स्कूलों की रद्द हो जाएगी मान्यता

फीस नियंत्रण पर अध्यादेश को लागू करने के लिए सीएम योगी ने ज़बरदस्त सख्ती दिखाई गई है. शुल्क नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक मंडल में मंडलीय समिति बनाई जाएगी. जिसका फैसला न मानने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

पहली बार में 1 लाख का जुर्माना, दूसरी बार में 5 लाख का जुर्माना और तीसरी बार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी. इसके साथ ही अभिभावकों की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और जल्द जांच के बाद स्कूल से पूछताछ की जाएगी.

दरअसल इन स्कूलों ने शिक्षा को धंधा और आम आदमी को लूटने का अड्डा बना के रख दिया था. स्कूल किताबों से खरीदो, यूनिफार्म स्कूल से खरीदो, उसके बाद 100 तरह के अलग अलग खर्चे जोड़ दिए जाते हैं. जिसके बाद भरी भरकम फीस बन जाती है जो के आम आदमी की कमर तोड़ने के लिए काफी है. लेकिन अब इन नए सख्त नियम स इस्कूलों पर लगाम लग सकेगी.

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