कर्नाटक मतदान के आंकड़ों ने चौंकाया, दलित, ओबीसी, किसानों, मुस्लिमों के वोटों को देख मोदी-राहुल हैरान

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नई दिल्ली : कर्नाटक में एक बार फिर बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रही. हालांकि बहुमत से उसकी कुछ सीटें कम रह गई हैं. मगर अब मतदाताओं का गणित सामने आ गया है, जिसने ना केवल कांग्रेस की नींद उड़ा दी है बल्कि देशभर की जनता को भी हैरान कर दिया है.

दलित, ओबीसी, लिंगायतों और किसानों ने मिलकर तोड़ा राहुल गाँधी का सपना

कांग्रेस ने मोदी लहर को रोकने की काफी कोशिशें की, जैसे कि लिंगायतों के जरिये हिन्दुओं में फूट डालने की कोशिश की गयी. sc/st एक्ट के जरिये मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिशें की गयी. भीम आर्मी के जरिये दलितों को बीजेपी से दूर करने की कोशिश की गयी. किसानों को भरमाने की कोशिश की गयी और मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते तीन तलाक के बिल का विरोध करके उनके वोट हासिल करने की कोशिश की गयी.

मगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि दलित, ओबीसी, लिंगायतों और किसानों ने मिलकर राहुल गाँधी के सपने को तोड़ दिया, मगर मुस्लिमों ने वोटबैंक बनकर कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा मतदान किया. बीजेपी की जीत में सबसे अहम भूमिका दलित, ओबीसी और लिंगायत वोट की रही. इसके अलावा किसानों की नाराजगी का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा. जबकि मुस्लिमों ने एकजुट होकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया.

कर्नाटक के 222 विधानसभा सीटों के आए नतीजों में 104 सीटें बीजेपी को मिली हैं. जबकि कांग्रेस को 78 सीटें और 37 सीटें जेडीएस के खाते में गई हैं. इसके अलावा 3 सीटें अन्य के खाते में गई हैं. पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में कांग्रेस को 44 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन अपने वोट फीसदी को बचाने में वो सफल रही है. जबकि बीजेपी के वोट फीसदी में भी बढ़ोतरी हुई है.

दलित, ओबीसी और आदिवासियों ने दिया मोदी का साथ

कर्नाटक में सबसे बड़ी आबादी दलित मतदाताओं की है. दलित समुदाय के लिए 35 सीटें यहां आरक्षित हैं. कर्नाटक में बीजेपी की जीत में अहम रोल दलित मतदाताओं ने निभाया. दलित समुदाय का 40 फीसदी वोट बीजेपी को मिला है.
कर्नाटक में आदिवासी समुदाय 7 फीसदी है और 15 सीटें उनके लिए आरक्षित हैं. आदिवासी समुदाय का भी 44 फीसदी वोट बीजेपी को मिला. ओबीसी समुदाय के वोट हासिल करने में भी बीजेपी पहले नंबर पर रही. कर्नाटक में ओबीसी समुदाय का 52 फीसदी वोट बीजेपी को मिला.

मुस्लिमों ने एकजुट होकर कांग्रेस को दिए वोट

राज्य में दलितों के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी मुस्लिम समुदाय की है.इसके 14 फीसदी वोट हैं. कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति काम कर गयी और मुस्लिमों का 78 फीसदी वोट कांग्रेस को मिला.

कर्नाटक चुनाव में वोटिंग ट्रेंड में भी बदलाव देखने को मिला. बीजेपी ने शहरी क्षेत्र से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में बेहतर प्रदर्शन किया. इसके पीछे किसानों की अहम भूमिका रही. राज्य के ग्रामीण क्षेत्र की 166 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें से 74 सीटें बीजेपी को मिली हैं. जबकि कांग्रेस 57 सीटें ही जीत सकी. वहीं जेडीएस के खाते में 33 और 2 सीटें अन्य को मिली हैं.

राज्य के आत्महत्या कर रहे किसानों ने विकास के मुद्दे पर बीजेपी का साथ दिया, जोकि बीजेपी के लिए फायदे का सौदा रहा. किसान बहुल 74 विधानसभा सीटें हैं. इनमें से 35 सीटें बीजेपी के खाते में गई हैं, जो कि 2013 के लिहाज से 11 सीटें बढ़ी हैं.

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