रमजान मे मुसलमानों पर टूटा चीन का कहर, ऐसा खौफनाक कांड देख, दहल उठा हर कट्टरपंथी का कलेजा

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नई दिल्ली : पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी जाते-जाते कह गए थे कि भारत देश में मोदी सरकार में मुस्लिम सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. लेकिन असल में भारत से ज़्यादा असहिष्णु कोई और दूसरा देश नहीं है. रोहिंग्या मुस्लिमों को भी लेकर भारत में विरोध होता है, इजराइल का विरोध भी भारत में होता है.

लेकिन जब भी चीन के मुस्लिमों की बात आती है सारे मौलवी, फतवेबाज और अंसारी जैसे लोग चुप्पी साध लेते हैं. अब रमजान त्यौहार में चीन का उइगूर मुस्लिमों पर कहर टूट पड़ा है जिसे देख मुस्लिम भारत को स्वर्ग समझना शुरू कर देंगे.

रमजान पर मुस्लिमों पर टूटा चीन का कहर

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक चीन ने इस बार रमजान पर मुस्लिमों के लिए और ज़्यादा कड़े नियम लागू कर दिए हैं और उन नियमों को नहीं मानने वालों पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है. चीन हर साल रमजान के दौरान सबसे ज़्यादा सख्ती दिखाता है और मुसलमानों के रोजा इफ्तार यानि व्रत पर रोक लगा देता है, मस्जिदों पर रोक, मस्जिद में बिना जांच के घुसने नहीं दिया जाता है, कुरआन पर रोक, नमाज़ पर रोक, नमाज़ की चटाई छीन ली जाती है.

ऐसा क्या है जो चीन नहीं रोकता रमजान में रोजा किसी ने रखा और प्रशासन को पता चला तो चीनी पुलिस मुह में जबरन खाना डालकर रोजा तुडवा देती है और सख्ती भी करती है.

हाथ पैर बाँध कर जबरन वर्जित मांस और शराब पिलाई गयी

साथ ही जो भी चीन के इन नियमों का उल्लंघन करता है उसके लिए एक अलग तरह के कैंप बनाये गए हैं. नियमों का पालन ना करने वाले, बहस करने वाले या पढ़ाई के लिए देर से आने वालों के हाथों-पैरों में 12 घंटे तक बेड़ियां बंधवा दी जाती हैं. नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ लोगों का मुंह पानी में डाल दिया जाता था.

मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यूरोपियन स्कूल ऑफ कल्चर ऐंड थियॉलजी इन कोर्नटल के आद्रियान जेंज ने कहा है कि चीन के इन रीएजुकेशन कैंप में कई हजार मुस्लिमों को रखा गया है। चीन के शिनजियांग प्रांत में करीब एक करोड़ 10 लाख मुस्लिम हैं और इसकी कुल आबादी 2 करोड़ 10 लाख है। इनमें से एक बड़ी संख्या को हिरासत में ले लिया गया है, जिनमें अधिकतर युवा पुरुष हैं. यही वजह है कि म्यांमार से रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश गए, चीन नहीं गए क्यूंकि उन्हें पता था चीन में जायेंगे तो म्यांमार से भी ज़्यादा बदतर ज़िन्दगी उनकी हो जायेगी.

ऊपर से कुटाई अलग से

चीन मुसलमानों को चीनी शिक्षा देने के लिए पेइचिंग में कैंप लगा रहा है और वहां पर मुसलमानों को जबरन बंद करके चीनी शिक्षा दे रहा है ताकि वो इस्लाम व कट्टरपंथ से दूर रह सके. तो वहीँ इस रमज़ान पर चीन में हर मुस्लिम पर कड़ी नज़र बनाये रखने के लिए CCTV कैमरों का सहारा लिया जा रहा है.

बीते साल सितंबर में भी शिनजियांग प्रांत के अधिकारियों ने उईगुर समुदाय को चेतावनी दी थी कि उन्हें कुरान, नमाज पढ़ने वाली चटाई सहित सभी धार्मिक चीजें सौंपनी होगी वरना वे कड़ी सजा के हकदार होंगे. चीन के इस कैंप में रह चुके एक मुस्लिम कायरात समरकंद ने बताया कि वहां पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और बहुत पिटाई की गई साथ ही वर्जित मांस खिलाया गया और शराब पिलाई गयी. जो इस्लाम में हराम है. साथ ही जबरदस्ती राष्ट्रपति शी जिनपिंग का शुक्रिया अदा करवाया गया और उनकी लंबी उम्र की कामना करने वाले नारे लगवाए गए.

समरकंद ने बताया कि करामागे गांव के एक कैंप में ही करीब 5 हजार 700 लोगों को बंदी बनाकर रखा गया है। इनमें लगभग सभी लोग कजख या उईगुर समुदाय के हैं। इतना ही नहीं करीब 200 लोग धार्मिक चरमपंथ को बढ़ावा देने के मामलों में संदिग्ध हैं.

इतना सब कुछ होने के बाद भी किसी मानवाधिकार वाले की हिम्मत नहीं होती की चीन के खिलाफ एक शब्द भी बोल जाएँ. लेकिन और कहीं भी दुनिया के किसी भी कोने में मुस्लिमों पर हो रहा अत्याचार मानवाधिकार संगठन को दिख जाता है चाहे वो सीरिया हो, म्यांमार हो, गाज़ा हो या कश्मीर हो. लेकिन कभी हिन्दुओं और कश्मीरी पंडितों पर हो रहे अत्याचार मानवाधिकार को नहीं दिखते. फिर भी लोग अपनी सत्ता की रोटी सेंकने के लिए भारत को असहिष्णु बोल देते हैं.

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