पाकिस्तान को लात मार भारत की शरण में आया ये बड़ा मुस्लिम देश, बरसाया इतना पैसा, देख पूरी दुनिया रह गयी दंग..

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आतंकी पाकिस्तान आज अपने सबसे बुरे दौर में चल रहा है, अर्थव्यवस्था एक डूबते जहाज़ की तरह हो गयी है और ऊपर से अमेरिका ने भी फंडिंग करनी बंद कर दी है और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए हैं. FATF संगठन ने बैन लगा दिया है जिससे ना तो कोई निवेश करेगा और ना ही क़र्ज़ देगा. चीन के लोग अब पाकिस्तान में घुसकर मार लगा रहे हैं.

तो वहीँ सऊदी अरब देश हर दूसरे दिन पाकिस्तान की बेज़्ज़ती करता रहता है अभी हाल में सऊदी अरब के सबसे बड़े अधिकारी ने पाकिस्तान के नागरिकों को देश में ना घुसने देने और ना ही नौकरी देने की मांग उठायी थी क्यूंकि हर रोज़ पाकिस्तानी नागरिक ड्रग तस्करी में पकडे जा रहे थे. दूसरी तरफ मोदी राज में सऊदी अरब ने अभी आलिशान मंदिर की नीव रखी थी तो अब वो खुद भारत सबसे बड़ा तोहफा लेकर आ रहा है और बेहद ही शानदार एलान किया है.

दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी रिफाइनरी

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक भारत के साथ द्विपक्षीय और कारोबारी संबंधों को मजबूती देते हुए दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी सऊदी अरामको ने महाराष्ट्र में सबसे बड़ी रिफाइनरी लगाने का फैसला लिया है.

44 अरब डॉलर का निवेश

सऊदी अरब की कंपनी अरामको के साथ भारतीय रिफाइनरी कंपनियों का समूह करीब 44 अरब डॉलर के निवेश से इस पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट को पूरा करेगा. इससे बड़ा निवेश आज तक पूरी दुनिया में नहीं हुआ.

महाराष्ट्र में लगने वाले इस प्रोजेक्ट में सऊदी कंपनी अरामको और रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (आरआरपीएल) की बराबरी की हिस्सेदारी होगी। आरआरपीएल, इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम का ज्वाइंट वेंचर होगा.

दुनिया के दिग्गज देश रह गए हैरान

बता दें आपको भी जानकार बड़ी हैरानगी होगी लेकिन इसे मोदी सरकार की बहुत बड़ी कामयाबी ही कहा जायेगा क्यूंकि इस प्रोजेक्ट की क्षमता सालाना 1.8 करोड़ टन उत्पादन की होगी. भारत में लगने वाला यह पेट्रोकेमिकल प्लांट दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक होगा. इसे देखने के बाद दुनिया के दिग्गज देशों की आखें बड़ी होने वाली हैं.

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खलीद अल फली ने कहा, ‘चाहे जितना भी बड़ा प्रोजेक्ट हो, लेकिन इससे हमारी भारत में निवेश की इच्छा खत्म नहीं हुई है। हम निवेश और अपने कच्चे तेल की सप्लाई के लिए भारत को तरजीह देते रहेंगे।’
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और सऊदी अरब के संबंध बेहद प्रगाढ़ हुए हैं।

सऊदी अरामको कुल कच्चे तेल की सप्लाई का करीब 50 फीसदी भारत के इस संयंत्र में प्रॉसेस करेगा। सऊदी अरब भारत में इराक को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा सप्लायर बनना चाहता है। इराक ने पहली बार 2017 में तेल निर्यात के मामले में सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया था.

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