सुप्रीम कोर्ट ने दिया हिंसा करने वाले दलितों को झटका, सुना दिया बेहद चौंकाने वाला फैसला, लोगों के उड़े होश

0
584

पिछले दो दिनों से दस राज्यों में भारत बंद में दलित आंदोलन ने दंगे की आग फैलाई हुई है. जिसमे अब तक 14 लोगों की मौत और हज़ारों करोड़ों की संपत्ति का नुक्सान हो चुका है. किसी माँ के बच्चे का सर फोड़ दिया गया, कोई व्यक्ति अपने बीमार बाप को कंधे पर लेकर गया जिनकी समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से मृत्यु हो गयी. तो कोई जाम में एम्बुलेंस फंस गयी उसमे मौत हो गयी.लेकिन आंदोलनकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने SC /ST एक्ट को लेकर सुनाया बड़ा फैसला

SC/ST एक्ट के कोर्ट के फैसले के बाद ये अफवाह फैलाई गयी कि SC/ST एक्ट को ख़त्म किया जा रहा है. जिसके बाद दलित आंदोलन को दंगे का रूप दिया गया है. सड़कों पर गोलियां चली, गाड़ियों के शीशे तोड़े, कुछ को आग के हवाले किया, दुकानों घरों में आग लगायी गयी. जिसके बाद अब तक 3000 से ज़्यादा दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है. तो वहीँ आज सुप्रीम कोर्ट ने फिर से SC/ST एक्ट को लेकर बेहद चौंकाने वाला फैसला सुना दिया है.

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक SC/ST एक्ट में हुए बदलावों के खिलाफ केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले पर किसी भी तरह से रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले ने दलित आंदोलनकारियों को बड़ा झटका दिया है जिन्होंने एक दिन के अंदर भारत बंद करके देश में आग लगा दी और हज़ारों करोड़ों की संपत्ति फूंक डाली.

कानून का हो रहा था दुरूपयोग

कोर्ट ने कहा ” हम एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, पर बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिए।’” दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ऐसे मामले में अब पब्लिक सर्वेंट की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी. इतना ही नहीं गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच जरूरी है और गिरफ्तारी से पहले जमानत भी दी जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC/ST एक्ट के तहत जो व्यक्ति शिकायत कर रहा है, उसे तुरंत मुआवजा मिलना चाहिए. इस मामले की सुनवाई जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने की. कोर्ट ने इस मामले में सभी पार्टियों से अगले दो दिनों में विस्तृत जवाब देने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी पब्लिक सर्वेंट पर केस दर्ज करने से पहले DSP स्तर का पुलिस अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा. किसी सरकारी अफसर की गिरफ्तारी से पहले उसके उच्चाधिकारी से अनुमति जरूरी होगी.

एससी/एसटी एक्ट के तहत फर्जी मामले आये सामने

गौरतलब है कि एससी/एसटी एक्ट के तहत कई मामले फर्जी भी सामने आ चुके हैं. लोगों का आरोप है कि कुछ लोग अपने फायदे और दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं. जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था.

फर्जी केस में लाखों रूपए मुआवजा वसूला जाता रहा है. सिर्फ आरोप लगाकर किसी की गिरफ़्तारी हो जाती थी. इस वजह से इस कानून में सुधार की ज़रूरत थी. लेकिन लोगों ने अफवाह फैलाई और आंदोलन के रूप में दंगे किया गए. 14 लोग मर गए किस वजह से ? क्या हासिल हुआ कुछ नहीं? कोर्ट ने अपना फैसला भी नहीं बदला. कुछ दंगाइयों से पत्रकारों ने पूछा किस बात के लिए आंदोलन कर रहे हो तो उन्हें खुद नहीं पता था कि क्या मसला है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here