सुन्नी वक्फ बोर्ड से सुप्रीम कोर्ट ने की ऐसी मांग कि सब रह गए एकदम हक्के-बक्के ! देखकर आप…

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देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर-प्रदेश में ताज महल को लेकर राजनीति चलती रहती है. इस बार ताज महल को लेकर जो ख़बरें सामने आ रही हैं उसे जानकर आप भी हैरान रह जाओगे. दरअसल, इस बार ताज महल पर मालिकाना हक को लेकर ख़बरें सामने आ रही हैं.

जिसके चलते मामला देश की सर्वोच्च न्यायालय में भी पहुँच गया. ताज महल पर अपना हक जताने वाले सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही मजेदार जवाब दिया है.

ताजमहल पर अपना मालिकाना हक जताने वाले सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट ने दिलचस्प आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने “वक्फ़ बोर्ड से कहा है कि वह मुगल शहंशाह शाहजहां का दस्तख़त लेकर आएं .” मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक “शाहजहां का दस्तख़त लाने के लिए वक्फ़ बोर्ड को एक हफ्ते का समय दिया गया है.”

आपको बता दें कि दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को बनाने के 18 साल बाद शाहजहां की मौत हो गई थी. शाहजहां ने इसका निर्माण अपनी पत्नी मुमताज की याद में करवाया था.

आपको बता दें कि साल 2010 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ बोर्ड के खिलाफ एक याचिका दायर की थी. इस याचिका को लेकर साल 2005 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें ताजमहल को वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति बताया गया था.

इस मकबरे का इतिहास खंगालते हुए सीजेआई ने वक्फ़ बोर्ड से सवाल किया कि “भारत में इस बात का यकीन कौन करेगा कि ताजमहल वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति है ? शाहजहां ने वक्फ़नामा पर दस्तख़त कैसे किए ? और यह आपको कब दिया गया था ?”

वक्फ़ बोर्ड ने वरिष्ठ वकील वीवी गिरी के जरिए यह दावा किया है कि शाहजहां के समय से ताजमहल पर वक्फ़ का हक़ है और वक्फ़नामे के तहत यह उनकी संपत्ति है. इसी दावे को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने चुनौती दी थी. इसके बाद एएसआई की तरफ से वकील एडीएन राव ने कहा, “उस वक्त वक्फ़नामा नहीं हुआ करता था.

” वकील राव ने कहा कि “1858 की घोषणा के अनुसार ब्रिटिश महारानी ने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से यह संपत्ति ले ली थी. 1948 एक्ट के तहत, बाद में भारत सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिया.”

जिसके बाद CJI दीपक मिश्रा ने शाहजहां द्वारा लिखे गए डॉक्युमेंट्स की मांग करते हुए कहा कि “नज़रबंदी के दौरान शाहजहां आगरा किले की कोठरी से ताजमहल देखा करते थे. नज़रबंदी में रहते हुए उन्होंने वक्फ़नामा साइन कैसे किया ? हमें बादशाह द्वारा साइन किए गए कागज़ात दिखाइए.”

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