तीन तलाक के बाद कश्मीर में धारा 370 को लेकर सुप्रीम कोर्ट आया एक्शन में, महबूबा के उड़े होश

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तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है. जहाँ लोकतंत्र की जीत पर पूरा देश खुशियां मना रहा है, वहीँ कई मुस्लिम संगठन मातम मना रहे हैं. मगर सबसे ज्यादा हालात खराब है कश्मीरी अलगाववादियों समेत महबूबा और फारुख अब्दुल्ला की है. जानकारों के मुताबिक़ तीन तलाक के बाद देश में एक और जबरदस्त काम होने जा रहा है, जिससे कश्मीर में अलगाववाद की राजनीति करने वालों के हाथ-पाँव फूल गए हैं.

आर्टिकल 35A होने वाला है ख़त्म !

जिस तरह से तीन तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में था, ठीक उसी तरह से संविधान के अनुच्छेद 35(ए) और धारा-370 के मामले भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं. जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाली धारा-370 पर सुप्रीम कोर्ट में बहस शुरू हो गई है और सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है कि धारा-370 को कैसे और क्यों खत्म किया जा सकता है. जानकारों के मुताबिक़ अब अगला फैसला कश्मीर से आर्टिकल 35A को ख़त्म किये जाने का आएगा

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जिसके बाद गैर कश्मीरी भारतीय लोग भी कश्मीर में जमीन खरीद पाएंगे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्टिकल 35A के कारण जम्मू-कश्मीर में रह रहे पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी, बाल्मीकी, गोरखा समेत लाखों लोग 60 साल बाद भी ना तो राज्य में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं और ना ही इनके बच्चे यहां व्यावसायिक शिक्षा में दाखिला ले सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट में है मामला !

एक एनजीओ ने धारा 370 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की हुई है, जिसपर सुनवाई चल रही है. एनजीओ ने अपनी याचिका में आर्टिकल 35A की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह अनुच्छेद कभी संसद में पेश ही नहीं हुआ बल्कि इसे तो राष्ट्रपति के आदेश पर लागू किया गया था.

इस प्रावधान को 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने धारा 370 में प्रदत्त राष्ट्रपति के अधिकारों का उपयोग करते हुए ‘संविधान (जम्मू एवं कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश 1954’ को लागू किया था.

इस याचिका पर तीन न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई कर रही है और मोदी सरकार भी आर्टिकल 35A को ख़त्म करने की इच्छुक है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला आर्टिकल 35A को ख़त्म करने का जरूर आएगा और देश की सूरत सदा के लिए बदल जायेगी. घाटी में अन्य राज्यों से लोगों के बसने से कश्मीर की राजनीति में बड़ा उलटफेर होगा और पत्थरबाजी व् अलगाववाद सदा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

वहीँ जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती कश्मीर के विशेषाधिकार पर ख़तरा देखकर बुरी तरह बौखला गयी हैं. दरअसल विशेषाधिकार के कारण ही इन टुटपुँजिये नेताओं की राजनीतिक दुकाने चल रही हैं, इसके चलते बौखलाहट खुलकर सामने आने लगी है. महबूबा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 35(ए) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को स्वीकार नहीं किया जाएगा. फारुख अब्दुल्ला ने तो कश्मीर में विद्रोह की धमकी तक दे दी है.

सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान को लगेगा, क्योंकि कश्मीर को तोड़ने का उसका सपना एक ही झटके में धराशायी हो जाएगा. ये बात तय है कि तीन तलाक की ही तरह आर्टिकल 35A के ख़त्म होने का वक़्त अब आ गया है.

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