देश की न्यायपालिका को लेकर हुआ सनसनीखेज़ खुलासा, लगा ऐसा कलंक कि हिल गया सुप्रीम कोर्ट, अदालतों की ये हकीकत देख मोदी भी हैरान

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हमारे देश में आज न्यायलय और न्यायधीश की सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण भूमिका है, एक आम आदमी से लेकर भ्रष्ट नेता और एक बड़े सेलिब्रिटी तक के न्याय करने वाल जज से लोग हमेशा इन्साफ की ही उम्मीद लगाते हैं.

न्यायपालिका के न्यायधीश ही घोंट रहे न्याय का गला

कोर्ट में लोग कदम ही ये सोच के रखते हैं कि ये इंसाफ का मंदिर है यहाँ उसे न्याय मिलेगा. लेकिन क्या होगा जब ये जज ही न्याय का गला घोटने लग जाये. जी हाँ ऐसे ही बड़ी न्यायपालिका को लेकर हैरतअंगेज़ खबर आ रही है जिसने पूरे देश को हिला के रख दिया और न्यायपालिका पर कलंक लगा दिया है.

बिक गए जज साहब कुछ हरी पत्तियों के लिए

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक जज और वकील की बड़ी मिलीभगत का खेल सामने आ रहा है. तेलंगाना राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 7.5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में निचली अदालत के एक सेशन जज और दो वकीलों को गिरफ्तार किया है. यह रिश्वत नारकोटिक्स के मामले में एक आरोपी को जमानत देने के लिए थी.

एसीबी की तरफ से बताया गया कि हैदराबाद हाईकोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज करने के बाद प्रथम अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सेशन जज राधाकृष्ण मूर्ति, वकील के. श्रीनिवास राव और जी. सतीश कुमार को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद इन तीनों लोगों को एसीबी मामलों की विशेष अदालत में पेश किया गया। ब्यूरो ने इन लोगों की 14 दिनों की न्यायिक हिरासत की मांग की है.

आपको बताते हैं कि पूरा मामला है क्या दरअसल वकील टी श्रीरंगा राओ ने अपनी शिकायत में बताया हाई कोर्ट को बताया कि एम टेक के छात्र दत्तु के खिलाफ एक्साइज केस रजिस्टर्ड था जिसमें बेल दिलाने और फैसला सुनाने के लिए मूर्ति ने रिश्वत की मांग की और बाद में 7.5 लाख की रिश्वत भी ली.

इसके बाद हैदराबाद मेट्रोपोलिटन सेशंस जज द्वारा की गई आंतरिक जांच के बाद हाई कोर्ट ने मामला एसीबी को सौंप दिया और जज पर लगे आरोपों की की जांच करने को कहा. फिर एसीबी ने मूर्ति समेत अन्य दो वकीलों के खिलाफ 11 अप्रैल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरु करी थी.

महिला को गहने बेचने पर किया मज़बूर

गहराई से जाँच में एसीबी को पता चला कि जज ने छात्र को बेल दिलवाने के लिए रिश्वत ली थी. जज की ओर से वकील के. श्रीनिवास राव और जी. सतीश कुमार ने रिश्वत की मांग की. जांच में यह भी सामने आया है कि छात्र की मां ने 7.5 लाख रुपये की बड़ी रकम देने के लिए अपने सोने के गहने बेच दिए थे.

अब बताइये जब न्याय देने वाला ही चंद पैसों में बिक जाए तो आप कहाँ इन्साफ मांगने जायेंगे. इससे पहले भी कई बार खबरें आयी हैं कि कैसे भ्रष्टाचारी जज, भ्रष्टाचारियों व् अपराधियों के साथ सेटिंग करके मामले रफा-दफा करवा देते हैं, ये बात किसी से छिपी हुई नहीं है. ऊपर से वक़्त दर वक़्त ये जज अपनी सैलरी दुगनी तिगुनी करवाते जा रहे हैं लेकिन फिर भी पैसों की भूख ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है.

दिल्ली निचली अदालत में भ्रष्टाचार के आरोप दो जज ससपेंड

कुछ ही वक़्त पहले खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी न्यायपालिका को फटकार लगाते हुए अपने दामन को साफ़ रखने के निर्देश दिए थे. तो वहीँ दिसंबर के महीने में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बड़ी कार्रवाई करी थी. जिसमे दिल्ली की एक निचली अदालत के दो जजों को भ्रष्टाचार के आरोप में लिप्त पाते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था.

द्वारका कोर्ट के अतिरिक्त जिला जज जितेंद्र मिश्रा और विशेष जज नवीन अरोड़ा पर भ्रष्टाचार व् घूसखोरी के आरोप लगे थे. इनमें से एक जज पर आरोप है कि जज साहब तो आरोपी की मदद करने के बदले में उसके पैसों पर विदेश तक घूम आये थे. वहीँ दूसरे जज पर केस रफा-दफा करने के लिए आरोपी से पैसे मांगने का आरोप लगा था.

भ्रष्टाचारी जज के चलते गवाह की जान पड़ी खतरे में

वैसे यदि पिछले काफी वक़्त से न्यायपालिका द्वारा लिए जा रहे फैसलों पर गौर किया जाए तो समझ आता है कि दूसरों को न्याय देने वाले न्यायाधीश महोदय तो खुद ही भ्रष्टाचार के दलदल में गोते लगाते हैं.

जिस तरह से 2जी घोटाले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया, अशोक चव्हाण पर केस चलाने की मंजूरी को खारिज कर दिया गया. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पी चिदंबरम, उसका बेटा कार्ति चिदंबरम को आसानी से पहली सुनवाई में जमानत दे दी गयी. जबकि सीबीआई ED चीखती रही कि ज़मानत मत दीजिये, सबूतों और गवाहों के साथ छेड़छाड़ हो जाएगी.

तो वहीँ कुछ दिन पहले ही कार्ति चिदंबरम केस में मुख्य गवाह इन्द्राणी मुखर्जी को दवा की ओवरडोज़ देकर मारने की कोशिश की गयी. खुद इन्द्राणी मुखर्जी ने कहा मेरी जान को खतरा है क्यूंकि मैं कार्ति के केस में गवाह हु.

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