2019 चुनाव से पहले मोदी सरकार को लेकर आयी चौंकाने वाली रिपोर्ट, कांग्रेस समेत वामपंथी भी रह गए हक्के बक्के

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नई दिल्ली : नक्सलवाद, नस्कली, इस देश का वो नासूर हैं जिसे पालने में काफी हद तक हमारे देश की पिछली सरकारों हाथ रहा है. वरना इतने सालों से अब तक देश को आज़ादी मिल चुकी होती.ना जाने कितने हमारे देश के जवानों ने अपना बलिदान दे दिया इस नक्सलवाद को ख़त्म करने में लेकिन अब जाकर उन बलिदानों के नतीजे सामने देखने को मिल रहे हैं.

नक्सलवाद को लेकर आयी इस रिपोर्ट ने देशभर के लोगो की आँखें खोल दी हैं साथ ही मौजूदा मोदी सरकार के काम की रिपोर्ट भी दे दी है. आप भी इस रिपोर्ट को पढ़ कर पीएम मोदी पर गर्व करेंगे.

अभी मिल रही ताज़ा खबर अनुसार छत्तीसगढ़ के सुकमा नक्सलियों द्वारा घात लगा के हमारे जवनाओं पर हमला किया गया, जिसमे 25 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गये थे. इसके बाद से मोदी सरकार ने स्पेशल कमांडो फाॅर्स, कोबरा कमांडो सबको खुली छूट दी और नक्सलियों के गढ़ में घुसकर ख़त्म करने की इजाज़त दी.

इस पर अब गृहमंत्रालय की बड़ी रिपोर्ट आयी है जिससे पता चलता है कि किस कदर तेज़ी नक्सली सिमटते जा रहे हैं और अपने खात्मे की ओर अग्रसर हैं. गृहमंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 4 सालों में देश के नक्सल प्रभावित 126 जिलों में से 44 जिले नक्सल मुक्त हो गए हैं.

सरकार ने इन क्षेत्रों को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है ओर अब इनमे मूलभूत सुविधाएं सड़क, बिजली का काम भी तेज़ी से शरुरु कर दिया गया है. 70 सालों से ये जिले अँधेरे में डूबे हुए थे. इसी अँधेरे में नक्सली छुपकर जवानों पर हमला किया करते थे, नक्सली ख़त्म तो अँधेरा भी अब छंटने लगा है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज़्यादा प्रभावित जिले जहाँ नक्सलवादियों की कट्टरता सबसे ज़्यादा हुआ करती थी ऐसे नक्सल प्रभावित जिले की संख्या भी 35 से घटकर 30 रह गई है.

इसके साथ साथ बिहार और झारखंड के पांच जिले अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से मुक्त घोषित कर दिए गए हैं।नक्सल मुक्त जिलों में झारखंड का दुमका, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़ और बिहार का नवादा और मुज्जफरपुर, तेलंगाना का भद्रादरी जो पहले खमम का ही अंग था.

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में नक्सली हिंसा कम हुई है। केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा ने बताया कि नक्सली हिंसा में आई कमी का सारा श्रेय सुरक्षा और विकास से जुड़े विभिन्न उपायों की बहुमुखी रणनीति को जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच देश के 44 जिलों में नकलियों का नामोनिशान मिटा दिया गया है.नक्सली हिंसा अब उन 30 जिलों तक सिमट गई है इनमें वो जिले भी शामिल हैं जो कभी इससे बुरी तरह प्रभावित थे। गृह मंत्रालय ने 10 राज्यों में 106 जिलों को नक्सल प्रभावित की श्रेणी में रखा है। उन्होंने बताया कि 11 राज्यों में 90 जिले तो ऐसे हैं जिसमे पिछले एक साल में 58 से कम बार हिंसा हुई है.

बता दें पिछले काफी दिनों से गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित जिलों के निरीक्षण के लिए पिछले कुछ दिनों से राज्यों के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की ताकि बदलती जमीनी सच्चाई के मुताबिक बलों और संसाधनों की तैनाती की जा सके.

जितने जल्दी नक्सलवाद ख़त्म होगा उतनी जल्दी हमारे जवान भी शहीद नहीं हुआ करेंगे.

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