आधी रात में फ़ोर्स ने मारा जामा मस्जिद इलाके में छापा, सामने आयी ऐसी हैरतअंगेज सच्चाई, सुरक्षा एजेंसियां समेत PM मोदी भी दंग..

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ये बात किसी से छिपी नहीं है कि दिल्ली के जामा मस्जिद के आसपास के इलाकों में आतंकवादी गतिविधियां होती है. इसे लेकर मनमोहन सरकार के दौरान एक पीआईएल भी दाखिल की गयी थी, मगर कांग्रेस सरकार ने अपने वोट बैंक की खातिर जामा मस्जिद में परोक्ष रूप से आतंकवाद और देश विरोधी गतिविधियों को बचाये रखा. अब इसी इलाके से एक बड़ी खबर सामने आ रही है.

जामा मस्जिद इलाका बन चुका आतंकियों का अड्डा

हाल ही में मथुरा में शताब्दी ट्रेन में बिना टिकट पकड़े गए कट्टरपंथी बिलाल अहमद वानी ने पूछताछ के दौरान कबूला कि जामा मस्जिद इलाके में आतंकवादी छिपे हैं. बिलाल ने बताया कि अक्षरधाम मंदिर को बम से उड़ाने की पूरी प्लानिंग की गयी है. इसके बाद यूपी एटीएस की टीम दिल्ली पहुंची और स्पेशल सेल, आईबी की टीमों के साथ देर रात जामा मस्जिद इलाके में छापेमारी की गई.

जामा मस्जिद एरिया के चितली कबर स्थित अल रशीद और जामा मस्जिद के ठीक सामने मौजूद जमजम गेस्ट हाउस में कई घंटे तक छापेमारी की गई. इसके अलावा अन्य गेस्ट हाउसों और होटलों की भी तलाशी ली गई.

पुलिस ने जमजम और अल-रशीद गेस्ट हाउस की सीसीटीवी फुटेज की जांच भी की. पुलिस ने डीवीआर कब्जे में ले लिया है. इसके अलावा, ठहरे संदिग्धों के आधार कार्ड की कॉपी और दूसरे दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं. जांच और छानबीन के दौरान आसपास के कुछ और गेस्ट हाउस और होटलों में सिक्यॉरिटी की गड़बड़ियां मिली है.

बुखारी और उसके पिता देते हैं देशद्रोही तत्वों को संरक्षण?

दरअसल जामा मस्जिद के तथाकथित शाही इमाम अहमद बुखारी और उसके पिता देशद्रोही तत्वों को संरक्षण देते हैं, ये बात किसी से छिपी नहीं है. मनमोहन सरकार के दौरान रईसुद्दीन नाम के एक शख्स ने पीआईएल दाखिल करके आरोप लगाया भी था कि, “अहमद बुखारी और उसके पिता अपने निजी इस्तेमाल के लिए जामा मस्जिद के आसपास के इलाकों का अवैध इस्तेमाल करते हैं और यहाँ सभी प्रकार की अवैध गतिविधियां, अवैध बाज़ार, आतंकवादी गतिविधियां यहाँ होती हैं. साथ ही कई असामाजिक तत्व भी इस स्मारक में आश्रय लेते हैं.

सब कुछ जानते हुए भी वोटबैंक की खात्री कांग्रेस सरकार ने कोई ख़ास कदम नहीं उठाया. अब एक बार फिर ये आरोप सही साबित हुए हैं कि आतंकवादियों के लिए जामा मस्जिद के आसपास का इलाका छिपने की सबसे बढ़िया जगह है.

मथुरा में यूपी एटीएस की गिरफ्त में आए बिलाल ने पूछताछ में कबूला कि वह अपने साथियों के साथ दो जनवरी को दिल्ली पहुंचा था. ये आतंकी जामा मस्जिद इलाके में एक होटल के कमरा नंबर 201 में रुके थे. बिलाल ने यूपी एटीएस को यह भी बताया कि उसके साथ सोपोर निवासी अशरफ और पुलवामा निवासी मुदस्सिर भी थे. 6 जनवरी की रात करीब 9 बजे सभी होटल से निकल गए.

अशरफ और मुदस्सिर ने उसे ट्रेन में बिठाया और चले गए. बिलाल को शताब्दी ट्रेन में संदिग्ध हालत में बिना टिकट पकड़ा गया था, जिसके बाद आरपीएफ जवानों ने उससे पूछताछ की थी. उसके जवाबों से जवानों को शक हुआ कि मामला कुछ गड़बड़ है और उसे मथुरा में एटीएस के हवाले कर दिया गया.

पूरी रात चली जामा मस्जिद इलाके में छापेमारी

सुरक्षा एजेंसियों के सूचना साझा करते ही जामा मस्जिद इलाके में लोकल पुलिस के अलावा यूपी एटीएस, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और आईबी की टीमें मौके पर पहुंच गईं. कट्टरपंथी बवाल ना करने लगें, इसलिए अतिरिक्त फोर्स को सादा कपड़ों में बुला लिया गया.

पुलिस की टीमों ने अल-रशीद व जमजम गेस्ट हाउस को घेर लिया. सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट पर लोकल पुलिस ने जामा मस्जिद इलाके के सभी गेस्ट हाउस में कमरा नंबर 201 की तलाशी ली. पूरी रात जामा मस्जिद इलाके में अफरातफरा मची रही.

जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को पता चला कि जिन युवकों के साथ बिलाल दिल्ली में रुका था वे कश्मीर स्थित अपने घर पहुंच गए हैं. जिसके बाद उन दोनों से पूछताछ करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां कश्मीर के लिए निकल गई. पुलिस सीसीटीवी फुटेज से मामले की छानबीन कर रही है.

जानकारों के मुताबिक़ अब वक़्त आ गया है कि जामा मस्जिद के आसपास के इलाकों से अवैध कब्जे हटाए जाएँ, कट्टरपंथी यदि बवाल काटते हैं तो उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए और जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक का दर्जा दे दिया जाए, ताकि केंद्र से विशेष अनुमति लिए बिना इसका उपयोग किसी भी तरह की गतिविधि में नहीं किया जा सके.

ये विडियो देखें :

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