जो सांसद 23 दिनों के बजट सत्र का वेतन लेने से इंकार कर रहे हैं उनको लेकर अब पीएम मोदी ने दिया बड़ा बयान…

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अगर ये कहा जाये कि इस वक़्त भारत में सिर्फ देश के प्रधानमंत्री में ही इतना दम है कि वो ऐसे कठोर फैसले ले जो कोई और उठाना तो छोड़िये उसके बारे में सोच भी नहीं सकता तो ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा.

जिन्हें ये पढ़कर ऐसा लग रहा है कि नहीं ये गलत है, ऐसा नहीं हो सकता वगैरह-वगैरह, उनके लिए आज एक अनोखा किस्सा लेकर आये हैं जिसे सुनने के बाद आप भी मानेंगे कि वाकई जो काम पीएम मोदी कर सकते हैं वो सब के बस की बात नहीं है. इस मामले के अनुसार प्रधानमंत्री ने 5 मार्च से अबतक चले बजट सत्र की फीस ना लेने का फैसला किया है.

जानिए क्या है इस फैसले का कारण?

दरअसल पीएम मोदी ने ये फैसला इस वजह से लिया है क्योंकि बीते कई दिनों से सदन में जारी गतिरोध और विपक्ष के हंगामे की वजह से काम नहीं हो पाया है. ऐसे में पीएम का इस मुद्दे पर ये पक्ष है कि अगर काम नहीं हुआ तो सैलरी किस बात की?

बताया जा रहा है इस फैसले की वजह से पीएम मोदी अपनी कुल वेतन जो लगभग 79,752 रुपए के करीब बताई जा रही है उसे त्यागने का फैसला ले चुके हैं. याद हो तो इससे पहले पीएम मोदी ने भाजपा सांसदों से संभी संसद का वेतन छोड़ने का सुझाव दिया था.

“जो सांसद बजट सत्र का वेतन नहीं ले रहे हैं हम उनका समर्थन करते हैं तभी तो…”

यहाँ ये भी जानना जरुरी है कि सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं बल्कि उनसे पहले केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने भी अपना वेतन छोड़ने का अहम फैसला लिया है.

इस बारे में अनंत कुमार ने कहा कि, “मैं बजट सत्र के उन 23 दिनों का वेतन नही लूँगा जब कांग्रेस और बाकी राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन के कारण संसद की कार्यवाही सही रूप से चल ही नहीं पायी थी.” अनंत कुमार और अब पीएम मोदी का ये कदम दिखाता है कि उन्हें देश की जनता के मेहनत से कमाए पैसे की परवाह है.

इस मुद्दे पर बात करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने बताया है कि, “कांग्रेस पार्टी ने जो ज़रूरी विधेयकों को पारित होने से समय-समय पर रोका है उससे करदाताओं के पैसे को काफी नुक्सान हुआ है. इसी के चलते भाजपा और कई सहियोगी दलों वाले राजग के सांसदों ने अपना वेतन ना लेने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है.”

जानकारी के लिए बता दें कि संसद के दोनों सदन भारी हंगामे की वजह से बुधवार को भी स्थगित किया गया था. इस दौरान विपक्ष के साथ साथ तमिलनाडु की पार्टियों ने भी प्रदर्शन और नारेबाजी तबतक चालु रखी जबतक सदन स्थगित नहीं हो गयी. राज्‍यसभा की कार्यवाही तो छह मिनट के अंदर ही स्‍थगित करनी पड़ी. वहीं लोकसभा चार मिनट के अंदर ही पहले दोपहर तक और फिर पूरे दिन के लिए स्‍थगित करनी पड़ी थी.

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