आप IPL देखने में बिजी हैं वहां पीएम मोदी ने रच दिया इतिहास, 60 साल में आज तक नहीं हुआ था ऐसा !

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बेहद दुःख की बात है कि आज़ादी के इतने सालों बाद कुछ लोगों के हाथों में स्मार्टफोन्स तो हैं लेकिन कुछ लोगों के पास आज़ादी के बाद से अब तक ना तो बिजली है, ना सड़क है, ना अन्य सुख सुविधाएं.

पिछली सरकारों ने जहाँ से वोट मिलता गया वहां काम किया और आगे निकल गयी. इस बीच खुद अब खुद पीएम मोदी ने इतिहास रच दिया है, जिसे देख लोगों के चेहरों पर अब जाकर मुस्कान आयी है.

पीएम मोदी ने रचा इतिहास, 60 साल में पहली बार हुआ ऐसा

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक भानुप्रतापपुर के लिए ऐतिहासिक दिन है जिसका ना जाने वो कैसे इंतज़ार कर रहे थे. पीएम मोदी ने दल्लीराजहरा-रावघाट रेललाइन परियोजना के अंतर्गत गुदुम से भानुप्रतापपुर के बीच नई रेललाइन का लोकापर्ण किया.

साथ ही दुर्ग से गुदुम तक चल रही डेमू को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई.

बता दें ये काम ऐतिहासिक तो है ही, लेकिन सबसे बड़ी बात वो ये कि इसमें जान तक का बड़ा खतरा था. क्यूंकि ये पूरा इलाका नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. भानुप्रतापपुर है यहाँ पहली बार ट्रेन चली है. लोग घंटों तक ऐसे देख रहे थे जैसे ना जाने क्या अजूबा देख लिया हो.

अब यह ट्रेन भानुप्रतापपुर से दुर्ग तक चलेगी। इस मौके पर भानुप्रतापपुर विधायक, अंतागढ़ विधायक और कलेक्टर सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. यहाँ पर उन मज़दूरों को भी एक सलाम बनता है जिन्होंने इतने ख़तरनाक इलाके में यह कदम उठाया.

एक और जो सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात है वो ये कि अपनी जान दांव पर लगाकर पीएम मोदी ने ये जोखिम भरा कदम उठाया और नक्सल के गढ़ में घुसकर विकास को हरी झंडी दिखायी है.

सबसे बड़ी बात जो रही वो ये कि इस दौरान रायपुर रेल मंडल की महिला कर्मचारियों को ट्रेन परिचालन का उत्तरदायित्व सौंपा गया। इस डेमू की खास बात यह है कि इसमें लोको पायलट, गार्ड, टीटी, टिकट वितरण क्लर्क, पोर्टर आदि महत्वपूर्ण पदों पर महिला कर्मचारी ही कार्यभार संभालेगी.

ऐतिहासिक क्षण के साथ ही माओवादियों की मांद में धड़धड़ाती हुई ट्रेन दौडऩे लगी। लोको पायलेट प्रतिभा को भानुप्रतापपुर से चलने वाली ट्रेन की जिम्मेदारी दी गई. केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण रावघाट रेल लाइन परियोजना के दूसरे चरण का काम गुदुम से भानुप्रतापपुर तक का काम पूरा हो चुका है। बस यहां तक यात्री ट्रेन चलाने की देर थी, वो भी पूरा शनिवार को पूरा हो गया.

दरअसल जवानों को खुली छूट देने के बाद कोबरा फाॅर्स तेज़ी से नक्सलवाद को ख़त्म कर रही है, जहाँ से नक्सलवाद ख़त्म होता जा रहा है वहां खुशहाली आ रही है.

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