हिन्दू एकता के सामने ओवैसी ने टेके घुटने, भगवा पगड़ी पहनकर उठाया ऐसा कदम, मुस्लिम संगठनों के उड़े होश

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बेलगाम : 60 वर्षों तक कांग्रेस देश में तुष्टिकरण की राजनीति करती रही. जेहादी तत्वों की जायज-नाजायज सभी तरह की मांगों के आगे सर झुकाती रही. हिन्दुओं को जातियों में बाँट कर वोटबैंक की राजनीति की घिनौना खेल खेलती रही. मगर 2014 में सत्ता पर काबिज होने वाले पीएम मोदी और बीजेपी सरकार ने हिन्दुओं को एक कर दिखाया.

ओवैसी ने पहनी भगवा पगड़ी

आलम ये है कि गुजरात चुनाव के वक़्त राहुल गाँधी जनेऊ धारण करके मंदिरों में माथा टेकते फिर रहे थे, मगर कर्नाटक चुनाव में तो खुद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिन्दुओं के आगे सर झुका दिया है. कट्टरता भरे भाषण देने वाले ओवैसी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जालीदार टोपी उतार कर भगवा रंग की पगड़ी पहन ली है.

आमतौर पर सार्वजानिक रैलियों के दौरान ओवैसी शेरवानी और सिर पर टोपी पहनते हैं और खूब भड़काऊ भाषणबाजी करते हैं, मगर इस बार रैली के दौरान ओवैसी सिर पर टोपी नहीं बल्कि भगवा रंग की पगड़ी पहने हुए दिखाई दिए.

बेलगाम में औवेसी ने चुनावी रैली को संबोधित किया. यहां वो भगवा पगड़ी पहन कर हिन्दुओं से जेडीएस उम्मीदवार के समर्थन में वोट मांगते नजर आए. कर्नाटक में चुनाव के लिए हफ्तेभर से भी कम का वक्त बचा है, ऐसे में कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस तीनों ही दलों के नेता लगातार चुनावी रैलियां कर रहे हैं.

ओवैसी ने माना हिन्दू एकता का लोहा

मतौर पर अपनी जनसभा में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने वाले ओवैसी अपनी भड़काऊ बाजी के लिए कुख्यात हैं, मगर पहली बार उन्होंने हिन्दू एकता के देखते हुए भगवा पगड़ी धारण की है. ओवैसी का ये नया अवतार चर्चा का विषय बन गया है और भगवा पगड़ी में उनकी फोटो सभी को चौकाने के लिए काफी है.

कर्नाटक ने जिन इलाकों में मुस्लिम आबादी रहती है, वहां ओवैसी की रैलियां आयोजित कराई जा रही हैं. चुनावी रैलियों में ओवैसी के निशाने पर मुख्यतौर पर सत्ताधारी कांग्रेस है लेकिन साथ में वह केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी पर भी निशाना साध रहे हैं. चुनाव में अगर किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता तो देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस किंगमेकर साबित हो सकती है क्योंकि तब किसी भी दल को बहुमत के लिए जेडीएस का ही साथ लेना पड़ेगा.

चुनाव नतीजों के बाद सवाल यह भी है कि क्या जेडीएस बीजेपी के साथ जाकर सरकार बना सकते हैं. हालांकि इतिहास में पहले भी ऐसा हो चुका है. तमाम ओपिनियन पोल कांग्रेस को राज्य चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरते हुए दिखा रहे हैं.

सेकुलरिज्म की आड़ में साम्प्रदायिकता को बढ़ावा

ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कर्नाटक चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. ओवैसी जो कि साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए मशहूर हैं, इस चुनाव में खुद को सेक्युलर होने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं. ओवैसी का कहना है कि यदि वो चुनाव में उतरते हैं तो सेक्युलर ताकतें कमजोर होंगी और कोई एक दल इसका फायदा उठा लेगा.

ओवैसी का मानना है कि बीजेपी-कांग्रेस दोनों की राष्ट्रीय दल पूरी तरह विफल साबित हुए हैं, इस वजह से उन्होंने चुनाव में जेडीएस को समर्थन करने का फैसला किया है. कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों पर 12 मई को वोटिंग होनी है और मतों की गणना 15 मई को होगी. इस चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस के बीच है.

ओवैसी की पगड़ी देखकर मुस्लिम संगठन भी हैरान रह गए हैं. हिन्दुओं का शोषण करने वाले, भड़काऊ भाषणबाजी करने वाले व् तुष्टिकरण करने वाले सभी नेता आज हिन्दुओं की एकता के सामने सर झुकाये खड़े हैं.

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