कर्नाटक चुनाव से पहले कांग्रेस को लोग ज़ोरदार झटका, मोदी सरकार ने चूर-चूर किया घमंड, सन्न रह गए सिद्धारमैय्या

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नई दिल्ली : कर्नाटक चुनाव से पहले कांग्रेस ने कई ऐसे पैतरे चले जिससे वोटबैंक सीधा उनके खाते में आ जाए और एक समुदाय मोदी और बीजेपी के खिलाफ चला जाय. इसके लिए कांग्रेस ने सबसे पहले अपने राज्य का अलग झंडा का प्रस्ताव पास कर दिया और फिर लिंगायत समुदाय को हिन्दू से तोड़कर अलग धर्म का दर्जा दे दिया.

लेकिन इनमे से कोई भी फैसला तब तक लागू नहीं हो सकता जब तक केंद्र में मोदी सरकार मंज़ूरी नहीं देती है. इसलिए कांग्रेस के हर चुनावी साज़िश वाले फैसले को मोदी सरकार ने कुचल डाला है.

नहीं मिलेगा कोई अलग झंडा

अभी मिल रही ताज खबर के मुताबिक कर्नाटक में अलग आधिकारिक झंडे की मंजूरी को लेकर कांग्रेस सरकार ने गृह मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा था. लेकिन राजनाथ सिंह ने साफ़ कह दिया है कि कांग्रेस के किसी भी प्रस्ताव को मंज़ूरी नहीं दी जायेगी जो की देश हित में नहीं होगा और जो देश की अखंडता को चोट पहुचायेगा.

राज्य में चुनाव से ठीक पहले सिद्धारमैया सरकार का यह फैसला झंडे के बहाने कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार करने का तरीका बताया जा रहा है. कन्नड़ समर्थित सभी संगठनों, कार्यकर्ताओं और साहित्यिक शख्सियतों के साथ एक बैठक के बाद सिद्दरमैया ने प्रस्तावित ध्वज का अनावरण किया.

आयताकार इस ध्वज में लाल, सफेद और पीले रंग की पट्टी है. झंडे को ‘नाद ध्वज’ नाम दिया गया है. झंडे के बीच में राज्य का प्रतीक दो सिर वाला पौराणिक पक्षी ‘गंधा भेरुण्डा’ बना हुआ है.

पहले से ही देश कांग्रेस की दी हुई कश्मीर समस्या भुगत रहा है. कश्मीर जहाँ अलग कानून अलग संविधान अलग झंडा है. लेकिन मोटा पैसे का पैकेज, सैन्य सेवाएं, सुविधाएं उसे सारी भारत ही देता है और पिछले साठ सालों में भारत के ही जवान कश्मीर में शहीद हो रहे हैं और कांग्रेस फिर भी बातचीत करके समाधान निकालने की बात करती है.

कश्मीर की तरह ही अब कर्नाटक का हाल भी कांग्रेस ने कुछ ऐसा ही कर दिया है. तुष्टिकरण की राजनीति करके उत्तर और दक्षिण भारत वासियों में एक दूसरे के खिलाफ नफरत पैदा कर दी. तभी आज कर्नाटक में हिंदी भाषा का विरोध होता है. मेट्रो से हवाई अड्डे से हिंदी में लिखे हुए नाम मिटाने की खबरें आम हो चली हैं.

आज कर्नाटक राज्य अलग झंडा मांग रहा है, फिर दूसरा राज्य मांगेगा फिर तीसरा. ऐसे में हर राज्य का अलग झंडा हो जाएगा. जब देश एक है तो राष्ट्रिय ध्वज भी एक ही होना चाहिए. धीरे धीरे अलग झंडा मांग रहे हैं कल को अलग संविधान मांगने लगेंगे.

ऐसे कैसे रहेगा एक भारत श्रेष्ठ भारत. वो भारत जिसे अलग धर्म, अलग भाषाएं, अलग संस्कृति के बावजूद भी सरदार पटेल जी ने एकजुट रखने के लिए जी तोड़ मेहनत करी थी. लेकिन कांग्रेस को इससे क्या लेना देना उसी तो बस सत्ता चाहिए देश चाहे टूटे.

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