पाकिस्तान का साथ देने, भारत पर कब्जे की कोशिश करने वाले चीन के खिलाफ मोदी का कडा कदम, काँप उठा ड्रैगन

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भारत के लिए पाकिस्तान से भी बड़ा यदि कोई ख़तरा है, तो उसका नाम है चीन. चीन न केवल 1962 में भारत के साथ विश्वासघात कर चुका है बल्कि अब भी भारत व् कई अन्य पडोसी देशों की जमीन पर कब्जे की कोशिशें करता रहता है. लालच का आलम केवल यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन अपने बेहद खराब माल के लिए दुनियाभर में बदनाम हो चुका है. अब चीन पर नकेल कसने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है.

चीन की 8 दिग्गज दवा कंपनियों पर लगेगा प्रतिबन्ध

बेहद खराब गुणवत्ता का सामान, नकली माल, मोबाईल ऍप के जरिये हैकिंग व् डाटा चोरी करने जैसी कई नीच हरकतों के कारण चीन कुख्यात है. अंतर्राष्ट्रीय संधियों के कारण चीन के साथ व्यापार एकदम से बंद तो नहीं किया जा सकता, मगर भारत सरकार ने चीनी कंपनियों पर दूसरे तरीके से नकेल कसने की तैयार कर ली है.

भारत सरकार ने चीन की 8 दिग्गज कंपनियों को बैन कर दिया है. दरअसल ये कंपनियां भारत में दवाई निर्माताओं के लिए खराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल की आपूर्ति कर रही रही हैं. खराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल से बनने वाली दवाइयां भारतीय नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती हैं. पिछली सरकारों ने भले इस ओर कभी कुछ ख़ास ध्यान ना दिया हो, मगर मोदी सरकार ने इसपर नकेल कसने का मन बना लिया है.

घटिया माल नहीं लेगा भारत

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डी.सी.जी.आई.) की एक विशेष निरीक्षण टीम ने इन 8 चीनी कंपनियों की जांच के बाद ये एक्शन लिया है. डी.सी.जी.आई. के सूत्रों के मुताबिक़ ब्लैकलिस्ट की गयी ये कंपनियां वर्तमान में भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का एक बड़ा हिस्सा सप्लाई कर रही हैं.

डी.सी.जी.आई. के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, ‘‘भारत सरकार नहीं चाहती कि भारत में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता किया जाए’’.

एक वर्ष के लिए चीनी दूध उत्पादों पर प्रतिबंध

बता दें कि इससे पहले भी मोदी सरकार ने चीन से दूध और दूध उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध को एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया था. चीन ने मिलावट की सभी हदें पार कर दी थी, जिसके बाद अपने नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार को चीन के इन उत्पादों पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ा.

चीन को खरबों का होगा नुक्सान

अभी हाल ही में गेल द्वारा विकसित की जा रही पाइपलाइन के 3 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट से चीनी कंपनियों को निकाल कर भी पीएम मोदी ने चीन को सख्त सन्देश दिया था.

भारत सरकार के इस कदम से कई फायदे होंगे, पहला तो भारतीय नागरिकों को मिलावटी सामान नहीं मिलेगा. दूसरा चीनी कंपनियों को अरबों का घाटा होगा, जिससे भारत पर कब्जे का ख़्वाब देखने के चीनी सपने की धज्जियां उड़ जाएंगी. तीसरा भारतीय कंपनियों को इससे राहत पहुंचेगी.

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