आप दलित आंदोलन की ख़बरों में व्यस्त हैं वहां रेलवे को लेकर आयी चौंकाने वाली रिपोर्ट, 35 साल का रिकॉर्ड टूटा

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मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद भारतीय रेलवे की सुरक्षा और स्वच्छता पर सबसे ज़्यादा ध्यान दिया गया. नई आधुनिक ट्रेन सौर ऊर्जा से चलने वाली तैयार की जा रही हैं. जिससे बिजली का खर्च ज़्यादा से ज़्यादा बचे. ट्रेन में बायो टॉयलेट लगाए जा रहे हैं. इस बीच भारतीय रेलवे को लेकर को चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है जिसने 35 सालों के सारे रिकॉर्ड को धराशायी कर दिया है.

मोदी राज में भारतीय रेलवे ने 35 साल का रिकॉर्ड तोड़ा

अभी मिल रही ताज़ा खबर अनुसार सुरक्षा के मामले में रेलवे ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. पिछले 35 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक वित्त वर्ष में 100 से कम दो अंकों में रेल दुर्घटनाएं हुई है. इस साल 30 मार्च तक 73 रेल दुर्घटनाएं हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष 2016-2017 के 104 दुर्घटनाओं से 29 प्रतिशत कम है.

सरकार इस आंकड़ों तेज़ी और ज़्यादा कम करने की कोशिशों में लगी हुई है, जबकि इनमे से कई घटनाएं साबित हो चुकी हैं कि वो हादसा या किसी की गलती से नहीं हुए थे. बल्कि कई कट्टरपंथियों की साज़िश सामने आयी जिन्होंने अपनी जिहादी मानसिकता दिखाते हुए रेल पटरियों पर बड़े भरी सरिये, बड़े बड़े पत्थर रख दिए थे. जिससे ट्रेन पटरी से उतर जाय. अमरावती एक्सप्रेस को लेकर ये सनसनीखेज़ खुलासा हुआ था.

फाइनैंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, वित्त वर्ष 1968-69 में पहली बार तीन अंकों की 908 रेल दुर्घटनाएं हुई थी. इसके बाद साल 1980-81 में रेलवे ने 1,013 दुर्घटनाओं को दर्ज किया था. और आज मोदी सरकार में ये आंकड़ा गिरकर केवल 73 रह गया है.

गौरतलब है कि मोदी राज में रेलवे ने सुरक्षा उन्नयन कार्यों पर विशेष बल दिया है. रेल सुरक्षा के लिए 2018 के बजट में 7,267 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई. भारतीय रेलवे ने ट्रैक के रखरखाव के लिए नवीनतम तकनीक का उपयोग करना शुरू कर दिया है.

आइये आपको बताते हैं मोदी सरकार में रेलवे के लिए क्या किया गया है. आज नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे का चहुमुंखी विकास और विस्तार हो रहा है जितना इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था. इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारतमाला सड़क परियोजना की तरह ही देश के सभी प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए एक हाई-स्पीड ट्रेन कॉरिडोर बनाने की तैयारी ज़ोरों से चल रही है.

10 लाख करोड़ रुपये की लागत से भारतमाला हाइवेज डिवेलपमेंट प्रोग्राम की तर्ज पर बनाया जाने वाला यह कॉरिडोर लगभग 10,000 किलोमीटर लंबा होगा. इन रेल लाइनों पर ट्रेनें 200 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चल सकेंगी.
केद्र सरकार ने 11,661 करोड़ लागत वाली रेलवे की 6 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है.

इन परियोजनाओं में यूपी, बिहार, एमपी और ओडिशा के दूर-दराज के इलाकों में रेल नेटवर्क का विस्तार, 881 किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण और दोहरीकरण शामिल हैं. इन परिजोनाओं के पूरा होने में 211 लाख मानव दिवस के बराबर रोजगार का सृजन होगा.

बिहार के मुजफ्फरपुर-सगौली व सगौली-वाल्मिकी नगर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण व दोहरीकरण होगा. 100.6 किलोमीटर और 109.7 किलोमीटर की इन दोनों परियोजनाओं पर 2,729.1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके अलावा 116.95 किलोमीटर लम्बे भटनी-औंड़िहार रेलवे लाइन का दोहरीकरण और विद्युतीकरण होगा भी होगा. 1,300.9 करोड़ रुपये की लागत से यह काम 2021-22 तक पूरा होने की उम्मीद है.

उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाके बुंदेलखंड में 425 किलोमीटर लंबी झांसी-मानिकपुर और भीमसेन-खैरार लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण को भी मंजूरी दी गई है. 4,955.72 करोड़ से ये काम 2022-23 तक पूरा होने की संभावना है.

इसके अलावा ओडिशा में 130 किलोमीटर लंबी जैपोर-मलकानगिरी नई लाइन परियोजना के 2,676.11 करोड़ की लागत से 2021-22 तक पूरा होने की संभावना है. यह परियोजना ओडिशा के कोरापुट और मलकानगिरि के जिलों को कवर करेगी. इस परियोजना से नक्सलवाद प्रभावित मलकानगिरि और कोरापुट जिलों में न सिर्फ बुनियादी ढांचे का विकास होगा, बल्कि नक्सलवाद पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी.

स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाओं के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए रेलवे मंत्रालय ने निजी कंपनियों को शामिल किया जा रहा है. आम बजट 2018 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के 600 स्टेशनों के पुनर्विकास करने का ऐलान किया था.

इन स्टेशनों को दोबारा बनाने में एक लाख रुपये की लागत आएगी. रेलवे ने अपनी इस महात्वाकांक्षी योजना में निजी कंपनियों को शामिल करने का फैसला किया है. इसके तहत रेलवे इन स्टेशनों का 25 से 50 प्रतिशत काम करने के बाद निजी कंपनियों को 99 साल की लीज पर सौंप देगी.

रेल पटरी के नवीनीकरण के काम में भी तेजी आई है. चालू वित्त वर्ष में नवंबर 2017 तक 2,148 किलोमीटर पुरानी रेल पटरियों को बदला जा चुका है. अब तक 2,367 मार्ग किलोमीटर के इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की रिकॉर्डिंग की गई. रेल परिचालन की गति बढ़ाने के लिए अर्ध हाई स्पीड और हाई स्पीड ट्रैक को लेकर काम जारी है.

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