क्या हिन्दुओ के मक्का में जाने से इस्लाम उजड़ जायेगा, मुस्लिम भ्रष्ट हो जायेंगे या मुस्लिमो की पोल खुल जाएगी?

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    मक्का-मदीना में हिन्दुओ के सहित गैर-मुस्लिम का जाना सख़्त मना है | जब कहते हो अल्लाह के सिवाय कोई ईश्वर नहीं है, तब क्यों हिन्दुओ से डरते हो, क्या हिन्दुओ के मक्का में जाने से इस्लाम उजड़ जायेगा |मुस्लिम भ्रष्ट हो जायेगा या मुस्लिमो की पोल खुल जाएगी?

    मक्का मदीना में केवल मुस्लिम धर्म के लोग ही दाखिल हो सकते है और जो मुस्लिम नहीं है उन्हें अंदर जाकर दर्शन करने की अनुमति नहीं है | आखिर इस तरह के सख्त नियम का कारण क्या है? क्या भगवान के घर जाने के लिए भी हमें किसी की अनुमति की आवश्यकता है? क्या श्रद्धा का भी जाति व धर्म के नाम पर बंटवारा किया जाता है?

    मक्का मदीना सऊदी अरब में स्थित है | इसी धरती पर 1400 साल पहले इस्लाम का जन्म हुआ था, और यही कारण है कि मुस्लिम धर्म से जुड़े सभी बड़े स्थान सऊदी अरब में स्थित है | उस स्थान पर काबा है, जिसकी परिक्रमा की जाती है | इस स्थान से हज की यात्रा आरंभ की जाती है, यहां पर दुनिया के कोने-कोने से मुसलमान पहुंचते है और यात्रा की शुरुआत करते है | इस त्यौहार को ‘ईदुल अजहा’ कहा जाता है | Makka Madina Hindus Not Allowed In Makka Madina Rahasya

    इस स्थान पर पहुंचने के लिए आप मुख्य नगर जेद्दाह से जा सकते है | यदि आप जेद्दाह से मक्का जाने वाले मार्ग पर प्रवेश करेंगे तो जगह-जगह पर आपको कुछ निर्देश देखने को मिलेंगे, जिस पर लिखा है कि मुसलमानों के अतिरिक्त किसी भी और धर्म का व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता | इस मार्ग पर अधिकांश सूचनाएं अरबी भाषा में लिखी होती हैं, जिसे अन्य देशों के लोग बहुत कम जानते है |

    एक सच की मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था…

    वैसे तो दुनिया भर में कई स्थानों को लेकर आलोचनाएं की जाती है | लेकिन उनमें कितनी सच्चाई है, जानना आवश्यक होता है | इसी तरह से मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का के बारे में भी कहा जाता है कि.. यह किसी समय पर यहाँ मक्केश्वर महादेव का मंदिर था |

    इस जगह पर काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है, और जिसे आज भी हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमानों द्वारा पूजा जाता है |

    लेकिन क्या कहता है इस स्थान का इतिहास..

    कहा जाता है की वेंकटेश पण्डित के ग्रन्थ ‘रामावतारचरित’ के युद्धकांड प्रकरण में उपलब्ध एक बहुत अद्भुत प्रसंग ‘मक्केश्वर लिंग’ से संबंधित है | इस प्रसंग में भगवान शिव व रावण से जुड़ी एक गाथा का उल्लेख किया गया है, शिव रावण द्वारा याचना करने पर उसे युद्ध में विजयी होने के लिए एक लिंग (मक्केश्वर महादेव) दे देते है, और यह वरदान देते हैं कि “जा, यह तेरी रक्षा करेगा”, मगर ले जाते समय इसे मार्ग में कहीं पर भी धरती पर नहीं रखना |

    शर्त के अनुसार रावण इस लिंग को आकाश मार्ग से लंका की ओर ले जाता है, परंतु मार्ग किसी कारण वश उसे धरती पर रख देता है | इस पश्चात वह दुबारा शिवलिंग को उठाने की कोशिश करता है, पर खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस स्थान से हिलता नहीं. वेंकटेश पण्डित के अनुसार यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है |

    काबा में भी हैं पवित्र गंगा जी इतिहास गवाह है, इस बात का कि जहां भी भगवान शिव जाते हैं उनके साथ गंगा और चन्द्रमा होते है | इन तीनों के रिश्ते को कभी अलग नहीं किया जा सकता. जहां भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित ही मौजूद होती है |

    कहा जाता है कि काबा के पास भी एक पवित्र झरना पाया जाता है जिसके पानी को स्थानीय लोग बहुत पवित्र मानते हैं. अपने हज यात्रा के दौरान सभी मुस्लिम इस झरने के पवित्र जल को अपने साथ बोतल में भरकर ले जाते है |

    आपको बता दें कि..गैर-मुस्लिम होकर भी गुरु नानक देव ने मक्का में प्रवेश किया था | सिख धर्म के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव ने जीवन भर अनेक स्थानों की यात्रा की और उसमें हिन्दू और मुस्लिम धर्म के बीच एकता व भाईचारे को बढ़ावा दिया | उन्होंने यातायात के बेहद कम साधनों वाले उस दौर में भी पूरे भारत ही नहीं बल्कि इराक के बगदाद और सऊदी अरब के मक्का मदीना तक की यात्रा की थी |

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