शोधकर्ताओं ने 6000 वर्षीय पुराने भगवान राम और भगवान हनुमान की नक्काशियां को इस मुस्लिम देश में खोज निकाला है…

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हिंदू धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म है| पाकिस्तान के पैदा हुए कनाडा के एक लेखक ने दावा किया है कि सभी भारतीय मुसलमान एक हिंदू वंश से आए थे। उन्होंने अक्सर कहा है कि उन्हें अपने हिंदू वंश पर गर्व है। पुरातत्वविदों ने पाया है कि सुमेर में एक प्राचीन राम मंदिर मौजूद था।

सुमेर दक्षिणी मेसोपोटामिया के ऐतिहासिक क्षेत्र में आधुनिक शहरी सभ्यता थी, जिसे आज के वक़्त में दक्षिणी इराक के नाम से जाना जाता है| आधुनिक पुरातत्वविदों ने कुछ बेहद आश्चर्यजनक खोजें की है|

सर लेनार्ड वूली की खोज को आधुनिक पुरातत्व की विजय के रूप में देखा जा सकता है| सर चार्ल्स लिओनार्ड वूली (17 अप्रैल 1880 – 20 फरवरी 1960) एक ब्रिटिश पुरातत्वविद् थे जो मेसोपोटामिया में ऊर में अपनी खुदाई के लिए जाने जाते थे।

सर लियोनार्ड वूली ने भगवान राम और भगवान हनुमान की नक्काशी का पता लगाया था|

वूली विश्व इतिहास में इसके महत्व को उजागर करना भूल गये थे|यह खोज हमें याद दिलाती है कि मेसोपोटामियन सभ्यता के दौरान प्राचीन हिंदू धर्म भी व्यवहार में था। यह अत्यंत महत्वपूर्ण खोज न केवल भारतीय परंपरा और पुरातत्व के बीच व्यापक अंतराल के सम्बन्ध को दर्शाता है बल्कि आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को भी दर्शाता है, जो महान भारतीय राष्ट्र को इराक और सुमेर के साथ एकजुट करता है।

लार्सा के राम सिन जिसकी याद में इस चैपल को समर्पित किया गया था वह वाल्मीकि के भगवान राम है। लार्सा के नाम अरारमा को भगवान राम के प्रतिध्वनि कहा जाता है। यह राम चैपल भगवान राम का सबसे पहला ज्ञात स्मारक हो सकता है और इसे संभवत दिलमुन व्यापारियों द्वारा बनवाया गया था जो इसके करीब रहते थे।

सुमेरियन ग्रंथों ने हमेशा दिलमुन का मगन (प्राचीन ओमान) और मेलुक्खा के साथ उल्लेख किया है। यह संभावना है कि इन 3 राज्यों को एक दूसरे के साथ लिंक किया गया था|

उदारवादी मीडिया इस बात पर शांत इसलिए है क्यूँ कि शायद उन्हें सऊदी अरब द्वारा इसके लिए वित्तपोषित किया जा रहा है| उनका उद्देश्य भारत को इस्लामी राज्य में बदलने का है, जो कभी नहीं होगा। भारत की महान संस्कृति और परंपराओं का आगे बढ़ना इसी तरह जारी रहेगा।

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