CJI दीपक मिश्रा ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया ज़ोरदार झटका, सुनाया ऐसा कड़ा फैसला, सन्न रह गए मुस्लिम संगठन

0
408

नई दिल्ली : देश में पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने बयान दिया था कि हर जगह मुस्लिम असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. बता दें अब तो वे इतना ज़्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं कि हर संपत्ति को अपना बताने लगे हैं. पहले राम मंदिर की ज़मीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना बताया. तो वही अब ताजमहल को लेकर भी कोर्ट में चौंकाने वाली मांग रख दी है जिसे सुन मुख्य न्याधीश ने करारा जवाब दिया है, जिसे सुन सभी कट्टरपंथी हक्के बक्के रह गए हैं.

राम मंदिर के बाद अब ताजमहल पर सुन्नी बोर्ड ने फंसाया पेंच

अभी मिल रही ताज अखबार के मुताबिक राम मंदिर के बाद अब ताजमहल को लेकर सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने अपना मालिकाना हक़ जताया है. पहले आपको समझते हैं पूरा माजरा है क्या . मोहम्मद इरफान बेदार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल कर ताजमहल को उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड की संपत्‍त‍ि घोषित करने की मांग की थी. जिसके बाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता से कहा कि वो वक़्फ़ बोर्ड जाएं.

CJI दीपक मिश्रा ने दिया करारा जवाब

इसके बाद वक़्फ़ बोर्ड ने ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) को नोटिस जारी करके जवाब माँगा था. ASI ने अपने जवाब में इसका विरोध किया और कहा कि ताजमहल उनकी सम्पत्ति है. लेकिन बोर्ड ने ASI की दलीलों को दरकिनार करते हुए ताज़महल को बोर्ड की सम्पति घोषित कर दी थी. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के पास है जो राम मंदिर का मुद्दा भी देख रहे हैं.

शाहजहां ने ताजमहल सुन्नी बोर्ड को दिया था

आज सुनवाई के वक़्त सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बड़ी अजीब सी दलील दी जिसे सुन सभी चौंक पड़े. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि ताजमहल पर सिर्फ उनका हक़ है क्यूंकि शाहजहां ने उसके हवाले ताजहमल किया था.

CJI दीपक मिश्रा – जाओ अब शाहजहां के हस्ताक्षर लेकर आओ

इस दलील को सुनते ही मुख्य न्याधीश गुस्से से तिलमिला गए और फटकार लगाते हुए कहा ऐसे दावे पर कौन विश्वास करेगा? ऐसी चीजें कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा “भारत में इस बात का यकीन कौन करेगा कि ताजमहल वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति है? शाहजहां ने वक्फ़नामा पर दस्तख़त कैसे किए? यह आपको कब दिया गया?”

इसके साथ ही सुन्नी बोर्ड को हड़काते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा जाओ अगली सुनवाई में शाहजहां का वक्फनामे पर हस्ताक्षर लेकर आना जिसपर लिखा हुआ हो की ताजमहल उनकी संपत्ति है. इसके लिए सिर्फ सात दिन की मौहलत दी जाती है.

एएसआई की तरफ से एडवोकेट एडीएन राव ने कहा, “उस वक्त वक्फ़नामा ही नहीं हुआ करते था. 1858 की घोषणा के मुताबिक, ब्रिटिश महारानी ने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से यह संपत्ति ले ली थी. 1948 एक्ट के तहत, बाद में भारत सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिया.” अब अगले हफ्ते देखना दिलचस्प होगा कि सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड शाहजहां के दस्तखत वाला फरमान पेश करता है या नहीं!

ताजमहल पर है सिर्फ ASI का हक़

कोर्ट ने कहा कि मुगलकाल का अंत होने के साथ ही ताजमहल समेत अन्य ऐतिहासिक इमारतें अंग्रेजों को हस्तांतरित हो गई थी. आजादी के बाद से यह स्मारक सरकार के पास है और एएसआई इसकी देखभाल कर रहा है.

दरअसल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने आदेश जारी कर ताज महल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था. एएसआई ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था.

सीजेआई दीपक मिश्रा ने शाहजहां द्वारा लिखे गए डॉक्युमेंट्स की मांग करते हुए कहा, “नज़रबंदी के दौरान शाहजहां आगरा किले की कोठरी से ताजमहल देखा करते थे. नज़रबंदी में रहते हुए उन्होंने वक्फ़नामा साइन कैसे किया? हमें बादशाह द्वारा साइन किए गए कागज़ात दिखाइए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here