कर्नाटक हार कर बुरी तरह बौखलाई कांग्रेस, मोदी को रोकने के लिए उठाया ऐसा कदम, मची सियासी खलबली

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नई दिल्ली : कर्नाटक की 224 सीटों में से 222 सीटों पर हुई वोटिंग के बाद कल सुबह 8 बजे मतगणना शुरू हुई. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने मिली, मगर इसके बाद समय बीतते ही बीजेपी को कांग्रेस पर भारी बढ़त मिल गई. बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. राहुल गाँधी, पीएम मोदी को जनता की मदद से नहीं रोक पाए तो उन्होंने एक बड़ा दांव खेला है.

मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस की चाल

मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस इस कदर बेकरार है कि जेडीएस को बिना शर्त समर्थन देने को भी तैयार हो गयी है, जिसके मुताबिक़ मुख्यमंत्री जेडीएस के कुमारस्वामी बनेंगे. कांग्रेस नेता जी. परमेश्वर ने कहा है कि वो हार को स्वीकार करते हैं और उसके समक्ष नतमस्तक हैं. सरकार बनाने के लिए हमारे पास आंकड़े नहीं है. ऐसे में कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए जेडीएस को समर्थन देने की पेशकश की है.

जेडीएस प्रवक्ता दानिश अली ने मीडिया में बयान दिया है कि जेडीएस शुरू से कह रही है कि कुमारस्वामी ही सीएम होंगे. नतीजे आने के बाद हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी को सत्ता से बाहर रखा जाए.

अमित शाह से घबराई कांग्रेस

कांग्रेस ने अपनी हार को भांपते हुए गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत को मतगणना से एक दिन पहले ही कर्नाटक भेज दिया था. हालांकि, कांग्रेस के लिए कर्नाटक में सरकार बनाना इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि बीजेपी इतनी आसानी से दक्षिण भारत में अपनी वापसी का मौका हाथ से जाने नहीं देगी. कांग्रेस इससे पहले भी बीजेपी से बेहतर स्थिति में होते हुए गोवा और मेघालय में सरकार बनाने का मौका गंवा चुकी है.

शाह की रणनीति से फिर धूल चाटेंगे राहुल?

सूत्रों के मुताबिक़ यदि बीजेपी सरकार बनाने के आंकड़े से पीछे रह भी जाती है, तब भी अमित शाह का मैजिक काम करेगा और सरकार बीजेपी की ही बनेगी. जेडीएस नेता कुमारस्वामी कांग्रेस के बजाए बीजेपी के साथ जा सकते हैं. इसकी वजह केंद्र में बीजेपी का सत्तारूढ़ होना है.

बात दें कि इससे पहले गोवा में 40 विधानसभा सीटों के लिए 2017 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने 17 सीटें जीती थीं और बीजेपी के पास 13 सीटें थीं, लेकिन बीजेपी यहां पर दूसरे दलों के समर्थन से सरकार बनाने में सफल रही. वहीं, इसी साल हुए 60 सीटों वाले मेघालय में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के पास 21 सीटें थीं, लेकिन 20 सीटें लाने वाली एनपीपी ने यूडीपी (6 सीटें), पीडीएफ (4 सीटें), एचएसपीडीपी (2 सीटें) और बीजेपी (2 सीटें) के समर्थन से सरकार बना ली थी.

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