कर्नाटक चुनाव से पहले कांग्रेस की धर्म बटवारे की रजनीति पर इस बड़े कांग्रेसी नेता ने कर डाला बड़ा खुलासा..

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नई दिल्ली : कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी हर वो दोगली चाल चल रही है जो उसे सत्ता में वापिस बने रहने में मदद करे. पहले कर्नाटक के लिए अलग झंडा और अब लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देकर धर्मों में बंटवारे का फैसला कांग्रेस ने मंजूर किया है. हालाँकि फैसले को सहमति तभी मिलेगी जब केंद्र में मोदी सरकार सहमति देगी और मोदी सरकार पहले से इसके विर्रुध है.

कर्नाटक में कांग्रेस ने खेली धर्म बंटवारे की राजनीति

लेकिन आखिरकार चुनाव आने से ठीक पहले लिंगायत समुदाय को हिन्दुओं से अलग धर्म देने की क्या ज़रूरत पड़ गयी. वो भी तब जब खुद कांग्रेस सरकार इस फैसले के खिलाफ थी तो फिर ये फैसला अब क्यों लिया गया जबकि केंद्र में कांग्रेस की नहीं बल्कि बीजेपी की सरकार है. जी हाँ आपने सही सुना खुद कांग्रेस इसके खिलाफ थी. इस धर्मबंटवारे की राजनीति में पूर्व गृहमंत्री कांग्रेस के ही सुशिल कुमार शिंदे ने बड़ा खुलासा किये है जिसे सुन आपके पैरों तले ज़मीन खिसक जायेगी.

साल 2013 की चिट्ठी से शिंदे ने किया बड़ा खुलासा

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक साल 2013 में जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी तब के मंत्री सुशिल कुमार शिंदे ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि तब भी कांग्रेस के पास प्रस्ताव आया था लिंगायत को हिन्दू धर्म से अलग करने के लिए. लेकिन तब खुद साल 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

दरअसल तब खुद एक बड़ा तबका कांग्रेस के खिलाफ हो जाता इसलिए वोटबैंक के चलते कांग्रेस ने इसे ठुकरा दिया लेकिन आज जब बीजेपी सत्ता में है तो कांग्रेस ने उसी वोटबैंक को मोदी सरकार के खिलाफ करने के लिए इस धर्म के बंटवारे का कार्ड फिर से खेला है. सुशिल कुमार शिंदे ने कहा पी चिदंबरम और शिवराज पाटिल में से किसी एक ने तब यह प्रस्ताव ठुकराया था.

साल 2013 कि एक चिट्ठी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये को जनता के सामने खोल के रख दिया है. कांग्रेस सरकार ने तब कहा था कि इस तरह के टैग से अनुसूचित जाति से संबंधित लोगों को नुकसान पहुंचेगा जो वीरशैव-लिंगायत धर्म को मानते आए हैं. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस इस कदम से सत्ता में बने रहने के लिए हिंदुओं का विभाजन चाहती है.

बताया हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग

14 नवंबर 2013 को रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से राज्य सरकार को मिले पत्र को कोट करते हुए संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि तब कांग्रेस सरकार ने वीरशैव-लिंगायत को हिंदू धर्म का एक अभिन्न खंड बताया गया था और इसे अलग धर्म का दर्जा देने से मना कर दिया था.

और अब हिन्दू धर्म से कर दिया अलग

इसका मतलब साफ़ शब्दों में अगर समझें तो जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी तब लिंगायत समुदाय को वो हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग मानती थी इसलिए अलग धर्म करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. लेकिन अब जब कर्नाटक में सत्ता खिसकती हुई दिखाई दे रही है तो वही कांग्रेस वोटबैंक के चक्कर में लिंगायत समुदाय को हिन्दू धर्म से अलग करने के फैसले को मंजूरी दे रही है. इसे कहते हैं जब आदमी सत्ता के लालच में अपनी आत्मा तक बेच खाता है.

रजिस्ट्रार जनरल ने गृह मंत्री को लिखी अपनी चिट्ठी में ये साफ लिखा कि लिंगायत हिन्दू धर्म का ही हिस्सा हैं. अपनी बात के समर्थन में रजिस्ट्रार जनरल ने कांग्रेस सरकार के ही पुराने फ़ैसलों, कर्नाटक हाईकोर्ट की टिप्पणी, पहले की जनगणनाओं और साहित्यिक साक्ष्यों को आधार बनाया है. रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक़ लिंगायत, जिन्हें पहले वीरशैव कहा जाता था, हिंदू धर्म के अंदर का ही एक संप्रदाय है.

क्यूंकि लिंगायत समुदाय 19% हैं और वो 100 सीटों पर असर डालते हैं इसलिए कांग्रेस ने ये गहरी चाल चली है. लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने से लोगो में बहुत आक्रोश है. लिंगायत समुदाय पहनते भगवा हैं ध्वज भी उनका भगवा फिर वो हिन्दू धर्म से अलग कैसे हो गए.

मेघवाल ने आगे कहा कि सिद्धारमैया चुनावी लाभ के लिए यूपीए सरकार के ही विजन के खिलाफ ही चले गए हैं. और अब खुद कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी कर्नाटक में चुनाव प्रचार करने पहुंच गए हैं. लेकिन क्या राहुल गाँधी इस बड़े वाले U TURN मारने का जवाब जनता को देंगे.

ये विडियो देखें :

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