दलितों की हिंसा देख घूमा आम जनता का माथा, कर दिया बड़ा कांड, दलित संगठनों के उड़े होश..

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दलित आंदोलन के नाम पर देश में घिनौना राजनीतिक खेल खेला जा रहा है. कल से ही देशभर में जमकर हिंसा व् उत्पात मचाया जा रहा है. खुलासों के मुताबिक़ दलित आंदोलन में मुस्लिम कट्टरपंथी भी जमकर आगजनी व् तोड़फोड़ कर रहे हैं. मगर आज राजस्थान से जो खबर आ रही है, वो तो और भी ज्यादा हैरान करने वाली है.

दलितों की हिंसा देख भड़के लोग
दलित आंदोलन के नाम पर हिंसा देख देशभर के लोग भी अब भड़क उठे हैं और दलितों के खिलाफ ही हिंसा शुरू हो गयी है. बताया जा रहा है कि राजस्थान के करौली में करीब 40 हजार लोग इकट्ठा हो गए और दो दलित नेताओं के घर जला दिए.

दलित हिंसा से गुस्साई भीड़ ने हिंडौन से मौजूदा विधायक राजकुमारी जाटव और पूर्व विधायक भरोसीलाल जाटव के घरों में आग लगा दी है. ये दोनों नेता दलित समुदाय से आते हैं. राजकुमारी जाटव बीजेपी से वर्तमान विधायक हैं. जबकि भरोसीलाल कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं.

हिंसा बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं लोग
लोगों ने गुस्सा प्रकट करते हुए आरोप लगाए हैं कि सोमवार को बंद के नाम पर जबरदस्ती लोगों की दुकानें बंद कराई गईं. इतना ही नहीं बाजार बंद कराने के नाम पर व्यापारियों के साथ मारपीट और लूटपाट भी की गई. इसके अलावा शहर के बाजारों की कुछ दुकानों में तोड़फोड़ भी की गयी.

सोमवार को दुकान और वाहन जलाए जाने के खिलाफ व्यापारी और अन्य समाज के लोगों ने आज बंद का आह्वान किया था. इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे थे. हालात तनावपूर्ण देखते हुए इलाके में धारा 144 लागू की गई थी. लेकिन इसका उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और धीरे-धीरे ये संख्या 40 हजार तक पहुंच गई. जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.

आरोप है कि इसी दौरान भीड़ हिंडौन से वर्तमान बीजेपी विधायक राजकुमारी जाटव के घर को निशाना बनाया. भीड़ ने उनका घर फूंक डाला. इतना ही नहीं भीड़ ने पूर्व विधायक को भी नहीं बख्शा. इलाके के पूर्व कांग्रेस विधायक भरोसीलाल जाटव के घर को भी आग के हवाले कर दिया.

मॉल में लगाई आग
भीड़ ने सिर्फ दलित नेताओं को ही निशाना नहीं बनाया. बल्कि संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया. यहां एक मॉल में आग लगा दी गई. जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. इस मामले में पुलिस प्रशासन की बड़ी चूक सामने आ रही है. सवाल उठ रहे हैं कि धारा 144 लागू होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग कैसे जमा हो गए.

बता दें कि सोमवार (2 अप्रैल) को एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के बदलाव वाले फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था. जिसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में दलितों ने धरना प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई जगह ट्रेन रोकी, सड़कें जाम की. साथ ही राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी, बिहार और पंजाब के कई शहरों से हिंसा की भी खबरें आईं.

जिसके बाद आज बड़ी तादाद में लोग जमा हुए और शहर के दो दलित नेताओं को निशाना बनाया. जिनमें एक बीजेपी विधायक और एक पूर्व कांग्रेस विधायक शामिल हैं. साथ ही मॉल को भी नुकसान पहुंचाया गया.

बीएसपी, कांग्रेस के इशारों पर हो रही हिंसा
फिलहाल, राजस्थान के करौली में हालात तनावपूर्ण हैं. इसके अलावा देश के दूसरे हिस्सों में स्थिति नाजुक लेकिन नियंत्रण में है. हिंसा फैलाने वालों की धरपकड़ की जा रही है. यूपी के मेरठ में इंटरनेट सेवा पर बैन लगाया गया है. मेरठ में बीएसपी के पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने दंगा भड़काया और आगजनी की, मगर योगी की पुलिस ने विधायक को उसके समर्थकों समेत धर-दबोचा.

साफ़ जाहिर है कि मोदी विरोध के लिए राजनीतिक पार्टियां देश जलाने पर आमादा हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मोदी सरकार का फैसला बताकर लोगों को भड़काया जा रहा है. वहीँ कट्टरपंथी मुस्लिम भी दलितों के प्रदर्शन में शामिल होकर खूब उत्पात मचा रहे हैं.

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