डोकलाम में चीन के पीछे हटने की असली वजह का अब हुआ सबसे बड़ा खुलासा, सच्चाई जानकार अमेरिका-रूस भी सन्न

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लगभग ढाई महीने तक एक-दूसरे के सामने डोकलाम में खड़ी चीन की सेनाएं अब पीछे हट चुकी है दुनिया ने इसे केवल भारत की जीत माना है, क्योंकि भारत तो पहले से ही चीन से दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने का प्रस्ताव रख चुका था. चीन ही अड़ा हुआ था कि भारत बिना किसी शर्त के अपनी सेना को पीछे हटाए. बहरहाल अड़ियल चीन ने आखिर ऐसा फैसला क्यों लिया, इसका खुलासा हो गया है.

चीन में भारत से लड़ने की ताकत ही नहीं

खुलासा हुआ है कि भारतीय सेना की ताकत पीएम मोदी के आने के बाद से काफी बढ़ चुकी है और दुनियाभर के देश आज भारत के समर्थन में खड़े हैं. चीन के पास दरअसल भारत से टक्कर लेने का दम ही नहीं है. चीन केवल अपना हव्वा खड़ा करके भारत को डराने की कोशिश कर रहा था.

चीन दरअसल उत्तरी कोरिया की ही तरह एक कम्युनिस्ट देश है. प्रोपगंडा फैलाना, झूठा प्रचार करना कम्युनिस्ट देशों की ख़ास आदत होती है. भारत तो पहले से जानता था कि युद्ध होने पर उसकी जीत निश्चित है, इसीलिए पीएम मोदी चीन की गीदड़ भभकियों को नज़रअंदाज करते हुए अपने अन्य कामों में व्यस्त थे. ताकतवर बोला नहीं करते, वो सीधे कर देते हैं.

झूठा प्रोपगंडा फैला कर भारत को डराने की योजना हुई विफल

चीनी सरकारी टेलीविजन सीसीटीवी ने तिब्बत में तैनात माउंटेन ब्रिगेड द्वारा सैन्य अभ्यास का सीधा प्रसारण दिखाया. चीन ऐसा अभ्यास हर साल करता है, फिर भी भारत पर दबाव बनाने के लिए चीनी मीडिया ने झूठ बोल दिया कि डोकलाम मामले से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जंगी साजोसामान तिब्बत भेजा जा रहा है.

पीछे हटने का मौक़ा तलाश रहा था चीन

आखिर तक जब चीन की डाल भारत के सामने नहीं गली, तो उसने पीछे हटने के लिए बहाना तलाशना शुरू कर दिया. ब्रिक्स समिट को सही मौक़ा जानकार तुरंत चीन ने भारत के साथ मांडवली कर ली और अपनी सेना पीछे हटा ली.

हालांकि चीन के थूक कर चाटने को देखकर चीनी नागरिकों को शर्मिंदगी ना हो, इसलिए चीनी मीडिया ने फिर से नया झूठ फैलाना शुरू कर दिया कि सिर्फ भारत ने सेना पीछे हटाई है, चीन की सेना वहां गश्त करती रहेगी. जबकि सच तो ये हैं कि चीन के अंदर भारत का सामना करने का माद्दा ही नहीं है.

युद्ध करती तो चीनी सेना मार खाती सो अचीन पूरी तरह मटियामेट ही हो जाता. इसलिए मौक़ा देखकर थूका हुआ चाट लिया और चीनी नागरिकों को चीनी सेना की गश्त वाली मीठी गोली दे दी.लग, ऊपर से व्यापार बंद होने पर चीन में भुखमरी फ़ैल जाती.

वहीँ अंतररार्ष्ट्रीय मंच पर चीन का नाम खराब होता और अमेरिका को भी दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के खिलाफ एक्शन लेने का मौक़ा मिल जाता.

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