त्रिपुरा CM बिप्लब देब का कांग्रेस और CPM पर टूटा कहर, कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, धराशायी हुआ लाल सलाम का गढ़

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नई दिल्ली : त्रिपुरा में ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी सीएम बिप्लब देब ने कई बड़े फैसले लिए, CMO में पहली बार तिरंगा लगा इससे पहले लाल सलाम का झंडा लगाया जाता था, विधानसभा में 25 साल में पहली बार राष्ट्रगान गया गया और सी.पी.एम वामपंथियों को भी खड़े हो कर सम्मान देना इससे पहले वे सिर्फ वामपंथी धुन पर नाचते थे.

तो वहीँ हाल ही में कांग्रेस और वामपंथियों और कुछ दोगले पत्रकारों ने मिलकर एकाएक त्रिपुरा सीएम बिप्लब देब पर हमला बोलना शुरू कर दिया, जिस त्रिपुरा की खबर साल में एक बार भी मुश्किल से मीडिया दिखाती थी आज उस त्रिपुरा सीएम पर हर घंटे खबर आ रही थी और डिबेट और प्राइमटाइम किये जा रहे थे. आखिर कांग्रेस और वामपंथी की कौन सी नस को बिप्लब देब दबा रहे थे जिससे वे इतना छटपटा रहे थे? अब वो ‘नस’ मिल गयी है.

त्रिपुरा सीएम बिप्लब देब का कांग्रेस और CPM पर टूटा कहर

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक त्रिपुरा की बिप्लब देव सरकार ने विपक्षी पार्टियों के अवैध ज़मीनों पर बने 100 से ज़्यादा ऑफिस धड़ाधड़ गिराने शुरू कर दिए हैं. आर्डर प्राप्त होते ही पहले दिन से बुलडोज़र की टीम निकल पड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई होनी शुरू हो गयी.

सोमवार को भी ओल्ड स्टैंड क्षेत्र में सरकारी और फ़ॉरेस्ट की ज़मीन पर अवैध तरीके से बने हुए माकपा, कांग्रेस और उनसे संबद्ध ट्रेड यूनियन के कार्यालयों को ध्वस्त कर दिया गया.

बेशर्म कांग्रेस ने कबूला गुनाह फिर भी करा विरोध

ये विपक्षी पार्टी वाले सी.पी.एम. और 0 सीट जीतने वाली कांग्रेस इतने ज़्यादा बेशर्म हो चुके हैं कि खुद अब अपने मुँह से कबूल कर रहे हैं. माकपा और कांग्रेस ने खुद ये माना है कि ये ऑफिस अवैध ज़मीनों पर बने थे लेकिन फिर भी वे हमला करना नहीं भूले उन्होंने बीजेपी सरकार की इस कार्रवाई को बदले की राजनीति से प्रेरित भी बताया है.

पहले यही कांग्रेसी रोते हैं कि दम है तो कुछ कार्रवाई करके दिखाओ सिर्फ बातें करने से कुछ नहीं होगा. अब जब कार्रवाई करके अवैध कार्यालयों को सरकारी ज़मीन से गिराया जा रहा है तो कह रहे हैं ये तो बदले की कार्रवाई हो रही है. त्रिपुरा CM बिप्लब देब का कांग्रेस और CPM पर टूटा कहर,कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, धराशायी हुआ लाल सलाम का गढ़

100 से ज्यादा अवैध कार्यालयों पर चला बुलडोज़र

पुलिस के मुताबिक सोमवार को राजधानी अगरतला में मौजूद ऐसे ही कुछ ऑफिसों को बुलडोज़र की मदद से गिरा दिया गया. आप यकीन नहीं करेंगे इसके आलावा पश्चिमी त्रिपुरा जिले में भी राजनीतिक पार्टियों के एक या दो नहीं पूरे 100 से ज्यादा अवैध कार्यालयों की पहचान की गई है. इन सभी दफ्तरों को नोटिस जारी किया जा चुका है. अब इनपर भी आज बुलडोज़र चलने का काम तेज़ी से हो रहा है. यही वजह है कि पिछले दो हफ़्तों से कांग्रेस त्रिपुरा सीएम पर हमला क्यों बोल रही है.

जिला मजिस्ट्रेट ( पश्चिमी त्रिपुरा ) मिलिंद रामटेके ने कहा कि सभी अवैध ढाचों को आने वाले दिनों में गिरा दिया जाएगा. रामटेके के मुताबिक अकेले पश्चिमी त्रिपुरा में ही 78 ऐसी जगहों की पहचान की गई है जहां ज़मीनों पर अवैध कब्ज़ा किया गया है. उन्होंने बताया कि इन सभी पार्टियों को 6 मई तक का वक़्त दिया गया था उसके बाद ही कार्रवाई शुरू की गई है.

बता दें खुद सीपीएम के त्रिपुरा स्टेट सेक्रट्री बिजन धर ने माना है कि सरकार ने उन्हे जिन जगहों के लिए नोटिस दिया है वो सारे ऑफिस सरकारी या वन क्षेत्र की ज़मीनों पर अवैध तरीके से बने हुए हैं. उन्होंने कहा आगे कहा कि ये काफी पुराने हैं और सरकार की मंशा अतिक्रमण हटाने की जगह राजनीतिक ज्यादा लग रही है.

25 सालों से अवैध निर्माण चल रहा था 

हम सरकार से इस फैसले को वापस लेने की अपील करते हैं. मतलब ये विपक्षी गैंग चाहते हैं कि उनके अवैध निर्माण भी न गिराए जाएँ. ये कहाँ का दोगलापन है. सोचिये 25 सालों से अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहा था. बीजेपी ना आती तो न जाने और कितने सालों तक चलता रहता. ये तो सिर्फ शुरुआत है 25 सालों से और क्या क्या अवैध चल रहा था वे भी खुलासे जल्द सामने आएंगे.

सीएम को अवैध निर्माण पर एक्शन लेने पहले से ‘आल पार्टी मीटिंग’ बुलानी चाहिए थी

कांग्रेस के नेता तो और ज़्यादा महान हैं, कांग्रेस स्टेट पार्टी प्रेजिडेंट बिराजित सिन्हा ने कहा कि हम सरकार के इस फैसले (अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई) के खिलाफ हैं और आने वाली 17 मई को इसके खिलाफ प्रदर्शन भी करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि सरकार को ऐसी किसी कार्रवाई को अंजाम देने से पहले ऑल पार्टी मीटिंग बुलानी चाहिए थी.

मतलब कांग्रेस चाहती है कि बीजेपी पूर्ण बहुमत वाली सरकार अवैध निर्माण के खिलाफ एक्शन लेने से पहले 0 सीट पाने वाली कांग्रेस के साथ “आल पार्टी मीटिंग” करे. ये है कांग्रेस का असली चेहरा एक तो खुद कबूल करते हैं कि अवैध निर्माण किया है लेकिन उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करके राज्य में अशांत स्थिति पैदा ज़रूर करेंगे.

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