पीएम मोदी की 56 इंच सीने की ताक़त के आगे झुका चीन, मिली बड़ी कूटनीतिक जीत, दंग रह गयी कांग्रेस

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नई दिल्ली : पीएम मोदी सरकार की डोकलाम विवाद के बाद तीसरी बड़ी कूटनीतिक जीत सामने आयी है. पहले डोकलाम को लेकर 73 दिनों तक विवाद चलता रहा. जिसके बाद मोदी सरकार की पहल से चीन ने अपनी सेना डोकलाम से पीछे हटा ली. उसके बाद कैलाश यात्रा के रास्ते को चीन ने खोला. तो वहीँ अब एक बार फिर मोदी सरकार और NSA अजित डोवाल की पहल से चीन फिर भारत के आगे झुका है.

पीएम मोदी के 56 इंच सीने की ताक़त के आगे झुका चीन

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक भारत और चीन के बीच बहने वाली नदियों पर सहयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अहम् वार्ता हुई है. चीन ने इस वार्ता के बाद कहा कि वह ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़ा डाटा भारत के साथ साझा करेगा. चीन ने पिछले साल डोकलाम विवाद के चलते ब्रह्मापुत्र नदी के जल प्रवाह को लेकर आंकड़े मुहैया कराना बंद कर दिया था. इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली नदी वार्ता है.

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत

इससे पहले डोकलाम विवादित क्षेत्र से चीन ने अपनी सेना को पीछे हटा लिया था. यही नहीं कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले जिस रस्ते पर चीन ने रोक लगायी थी उसे भी चीन ने हटा लिया था. जिसके बाद कांग्रेस ने बड़ा हमला बोलै था लेकिन जल्द ही चीन ने फैसला वापिस ले लिया और इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है.

बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों देशों में बहने वाली नदियों के संबंध में भारत-चीन विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) की 11वीं बैठक मंगलवार को चीन के हांगझोऊ शहर में समाप्त हुई, वार्ता दो दिन चली.

भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व जल संसाधन मंत्रालय में आयुक्त् के पद पर कार्यरत तीरथ सिंह मेहरा ने किया वहीं चीनी दल का नेतृत्व जल संसाधन मंत्रालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग विभाग के काउंसल यु शिंगजुंग ने किया.

गौरतलब है कि नदी में बाढ़ का पता लगाने के लिहाज से महत्वपूर्ण इन आंकड़ों को चीन ने पिछले साल भारत के साथ साझा करना बंद कर दिया था. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मानवीय भावनाओं और द्विपक्षीय संबंधों को विकसित करने की दोनों देशों की इच्छा के मद्देनजर हम पनबिजली सूचना सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे।’ वह पत्रकारों के सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या अब चीन ब्रह्मपुत्र में जल प्रवाह से जुड़े पनबिजली संबंधी आंकड़ों को भारत के साथ साझा करेगा.

अधिकारियों ने ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों में बाढ़ के मौसम में पनबिजली से जुड़े चीन और भारत के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया. ईएलएम की शुरुआत 2006 में हुई थी. इस समझौते के तहत चीन 15 मई से 15 अक्तूबर के बीच ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के आंकड़े भारत को उपलब्ध कराता है. लेकिन डोकलाम में 73 दिनों से चले आ रहे विवाद की वजह से चीन ने ये फैसला लिया था लेकिन अब फिर भारत के दबाव में फैसला वापिस ले लिया है.

इस प्रकार की खबरें आती रही थीं कि चीन भारत पर पानी के जरिए हमला कर सकता है. बरसात के मौसम में लगातार पड़ोसी देश एक-दूसरे से नदियों में बढ़ते जलस्तर और बांधों से कितना पानी छोड़ा जा रहा है, इस बारे में आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं, ताकि अगर बाढ़ जैसे हालात हों तो उससे निपटने की तैयारी की जा सके.

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