बड़ा झटका: पीएम मोदी अब करेंगे ऐसा काम जिससे पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची, देखिये आप भी…

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पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज आने का नाम नहीं लेता है. आये दिन सीमा पर आतंकियों द्वारा घुसपैठ और पाक आर्मी की तरफ से सीज फायर उलंघन के मामले सामने आते रहते हैं. भारतीय जवान हर बार आतंकियों को माकूल जवाब देते हुए 72 हूरों के पास रवाना कर देते हैं. जिसके बाद भी पाकिस्तान मानता नहीं है. इतना ही नहीं आतंकियों को घुसपैठ कराने में पाक आर्मी पूरा समर्थन करती है. पाकिस्तान की काली-करतूत आज दुनियाभर में जगजाहिर हो चुकी है कि वह किस तरह आतंकियों को अपने यहाँ पनाह देता है.

केंद्र में जबसे बीजेपी की सरकार आई है तब से लेकर अब तक पीएम मोदी जी ने पाक को कई बड़े झटके दिए हैं, जिसमें से एक सर्जिकल स्ट्राइक था. मोदी सरकार ने यह बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिला दी और दिखा दिया कि जिस दिन भारत चाहेगा घर में घुसके ऐसे ही मारेगा. अब मोदी सरकार पाक को एक और बड़ा झटका देने जा रही है जिसे जानने के बाद कईयों के होश उड़ सकते हैं. पाक की नजरों में चुभने वाले काम को अब मोदी सरकार करने जा रही है.

बता दें पीएम मोदी जी इस महीने दो दिन के लिए कश्मीर जाने वाले हैं. इस यात्रा के दौरान वह पाक को बड़ा झटका देते हुए किशनगंगा पनबिजली परियोजना का उद्घाटन करेंगे. इसी के साथ वह लद्दाख के आध्यत्मिक गुरु कुशक बकुला की 100 वीं जयंती के कार्यक्रम में शामिल होंगे.

मोदी सरकार जिस परियोजना का उद्घाटन करने जा रही है ये वही योजना है जिसके निर्माण पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई थी. हालाँकि पीएम मोदी जी के इस दौरे को लेकर अभी अधिकारिक रूप से घोषणा नहीं की गयी है लेकिन 19 मई को कश्मीर जाने की उनकी संभावना है.

गौरतलब है कि इस दिन वह राष्ट्र को 330 मेगावाट की किशनगंगा पनबिजली परियोजना को सौंपेंगे, बता दें इसका निर्माण PMO की निगरानी में संपन्न हुआ है. आइये बताते हैं आपको क्या है किशनगंगा प्रोजेक्ट- यह प्रोजेक्ट उत्तर कश्मीर के बांदीपुर में स्थित है. किशनगंगा नदी की धारा को मोड़कर सरकार ने 23.25 किलोमीटर लंबी सुरंग बनवाकर भूमिगत पॉवर हाउस बनवाया है.

यह पॉवर हाउस हर वर्ष 171.3 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा. लाख कोशिश करने के बाद भी पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा है और अब पीएम मोदी जी द्वारा इस योजना का शुभारंभ होने जा रहा है. जानकारी के लिए बता दें इस परियोजना की शुरुआत साल 2007 में हुई थी. जिसके बाद 17 मई 2010 को पाकिस्तान इसके निर्माण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में चला गया था.

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने साल 2013 में भारत के पक्ष में इसका फैसला करने का निर्णय लिया. अदालत ने इसके पीछे दलील दी कि सिंधु जल समझौते के तहत भारत को बिजली उत्पादन के लिए यह अधिकार है कि वह इसकी जलधारा को मोड़ सके. अब यह कार्य पूरा हो गया है और पाक को एक और बड़ा झटका लगने जा रहा है.

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