मीडिया ने भी नहीं दिखाए ‘आप’ के आंकड़े, देखकर आपके क्या ‘आप’ वालों के भी होश भी उड़ जाएंगे…

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम ने सभी राजनीतिक दलों को हिलाकर रख दिया है. कर्नाटक की जनता ने राज्य में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत न देकर सभी दलों का पूरा गणित ही बिगाड़ दिया. इन दलों में मुख्य रूप से कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस हैं.

अब बात करते हैं इन चुनावों में उतरी ‘आम आदमी पार्टी’ की, जिसने ऐसा प्रदर्शन किया है जिसके बारे में जानकर आप चकित रह जाएंगे. ऐसा लगता है कि शायद इसने ही सभी दलों का गणित बिगाड़ दिया हो. ‘गणित बिगाड़ने’ वाली बात को आप गंभीरता से न लें क्योंकि पूरी खबर पढ़ने के बाद आप समझ सकते हैं कि केजरीवाल जी कैसे राजनेता हैं और आखिर वो राजनीति में कौन सा इतिहास लिखना चाहते हैं.

आपको बता दें कि केजरीवाल ‘सर’ जी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात, नागालैंड, गोवा, मेघालय और यूपी में भी चुनाव में हाथ आजमाया था. इन चुनाव के बारें में आपको पता होगा लेकिन अब बात करते हैं कर्नाटक की. कर्नाटक में भी केजरीवाल जी को अन्य राज्यों की तरह ही हार का सामना या ये कहें कि करारी से भी करारी हार का सामना करना पड़ा है.

कर्नाटक चुनाव में केजरीवाल की पार्टी ने 224 सीटों में से मात्र 28 सीटों पर चुनाव लड़ा. इन सीटों पर ‘आप’ के सभी प्रत्याशियों जमानत जब्त हो गई. इन चुनावों में आप की स्थिति गोवा चुनाव की तरह ही हो गई वहां पर भी आप के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी.

कर्नाटक में तो आप प्रत्याशियों का ये हाल हुआ कि उनको 500-500 वोट भी नहीं मिल पाए. बता दें कि कर्नाटक चुनाव में केजरीवाल ने दिल्ली के विकास मॉडल का सपना वहां की जनता को दिखाया गया था. पार्टी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम पर वोट मांगे थे. लेकिन जनता को केजरीवाल सर जी दिल्ली का विकास समझ नहीं आया.

कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान ‘आप’ पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केजरीवाल के नाम का खूब इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार हमारा मुख्य मुद्दा है. मगर जनता ने ‘आम आदमी पार्टी’ को सिरे से नकार दिया है. इस चुनाव में सभी 28 प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 21 हजार वोट मिले हैं. वैसे केजरीवाल की लगातार हार का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले पूर्वोत्तर के राज्यों में भी पार्टी की लुटिया डूबी है.

नगालैंड और मेघालय में भी वहां की जनता ने सीएम केजरीवाल की पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया था. इन राज्यों में इस दल को बहुत कम वोट मिले थे. पूर्व मंत्री व ‘आप’ के नाराज विधायक कपिल मिश्रा की मानें तो ‘आप’ मेघालय में केवल 6 सीटों पर ही प्रत्याशी उतार सकी थी. ‘आप’ को सभी 6 सीटों को मिलाकर मात्र 1140 वोट ही मिले पाए. वहां इससे अधिक नोटा पर वोट पड़ गए. वहीं नगालैंड में भी ‘आप’ को कुल मिलाकर 7355 वोट मिले.

आम आदमी पार्टी का यह कारनामा कर्नाटक चुनावों से शुरू नहीं हुआ है यह तो बहुत पहले से ही चालू है. इससे पहले 27 फरवरी को पंजाब के लुधियाना में नगर निगम के 95 वार्ड में हुए चुनाव में भी ‘आप’ बुरी तरह औंधे मुंह गिरी थी. केवल एक सीट पर ही जीत हासिल हो सकी थी. गुजरात में भी आम आदमी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली.

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