सोनिया गांधी और मालेगांव ब्लास्ट के कनेक्शन का हुआ ये सनसनीखेज खुलासा, PM मोदी समेत योगी जी भी रह गए हैरान

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नई दिल्ली: देश को बेच देना देश के साथ गद्दारी करना; ये महज मुहावरे नहीं रहे, बल्कि कांग्रेस ने इन्हे हकीकत का अमली जामा पहना दिया है. कांग्रेस ने सत्ता के दौरान देश के खिलाफ किस प्रकार से साजिश रची थी और कैसे बेगुनाहों को फंसाया गया था, इसका एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने देश को हिला कर रख दिया है. कैसे सोनिया गांधी देश के प्रमुख हिन्दू नेताओं के पीछे हाथ-धो कर पड़ी हुई थी और उन्हें फंसाने के लिए साजिशों के जाल बुने गए थे.

भागवत और योगी को फंसाने की थी साजिश

कर्नल पुरोहित के बाहर आने के बाद मालेगांव ब्लास्ट मामले में झूठा कैसे बनाकर फंसाये गए सुधाकर चतुर्वेदी ने कांग्रेस सरकार की पोल खोल दी है. सुधाकर ने बताया है कि मुंबई एंटी टेरर स्कॉड (एटीएस) ने इस केस की जांच में ऐसे हथकंडे अपनाए थे, जिनसे जाहिर हो रहा था कि वो बेगुनाह लोगों को इस केस में घसीटना चाहती है.

सबसे अहम् खुलासा जो सुधाकर ने किया है, उसके मुताबिक़ कांग्रेस के इशारों पर एटीएस योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को भी इस केस में फंसाना चाहती थी.

सुधाकर को भी कर्नल पुरोहित की ही तरह इस झूठे केस में फंसाया गया और बिना सबूतों के 9 साल तक जेल में बंद रखा गया. उनपर जुल्म व् यातनाओं के कहर बरसाए गए. 9 साल बाद जमानत मिलने के बाद सुधाकर ने और भी कई खुलासे किए हैं. सुधाकर ने बताया कि हिंदू कार्यकर्ताओं को निशाने पर लेकर तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार महाराष्ट्र में अपना वोट बैंक बना रही थी.

भगवा आतांकवाद के नाम पर हिन्दू नेताओं को जेल भेजने की साजिश

सुधाकर ने बताया कि उससे कई बार योगी आदित्यनाथ और उनके संगठन हिंदू युवा वाहिनी के बारे में पूछा गया. उनके सवालों से ऐसा लगता था कि वे योगी आदित्यनाथ को ब्लास्ट का मुख्य आरोपी बनाना चाहते थे. इतना ही नहीं एटीएस यह भी जानने की कोशिश कर रही थी कि उनके आरएसएस नेताओं से कैसे संबंध हैं? यहां तक की जांच के दौरान सुधाकर को थर्ड डिग्री का सामना भी करना पड़ा था.

मतलब मार-मार कर उनसे कहा जा रहा था कि वो ऐसी गवाही दे-दें, जिनसे योगी आदित्यनाथ को भी झूठे केस में फंसा कर जेल भेज दिया जाए. सुधाकर ने बताया कि उन्हें नासिक स्थित घर ने उठाया गया था और लंबी पूछताछ के बाद एक प्राइवेट 7 सीटर विमान से भोपाल भेजा गया. सुधाकर को संग्राम सिंह के नाम से भोपाल ले जाया गया. इतना ही नहीं उन्हें फंसाने के लिए उनके नासिक वाले घर में आरडीएक्स भी रखा गया था.

झूठे सबूत प्लांट किये गए

हालांकि बाद में जांच जब राष्ट्रीय जांच सुरक्षा को सौंपी गई तो एनआईए तब पता चला कि सुधाकर के घर में आरडीएक्स एक प्लानिंग के तहत रखा गया था. हालांकि, एनआईए ने यह चार्जशीट में नहीं बताया कि प्राइवेट जेट का फंड कहां से मुहैया हुआ और गैर-कानूनी पिस्टल-आरडीएक्स कहा से आया?

वामपंथी जजों के कारण बची है कांग्रेस

अब सवाल ये है कि कांग्रेस, एनसीपी व् एटीएस के उन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच चलाकर उन्हें कम से कम मृत्यु दंड क्यों नहीं दिया जाना चाहिए?

मगर साफ़ है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे कांग्रेस इसे राजनीतिक षड्यंत्र कहेगी और यदि इनके खिलाफ सबूत मिल भी गए तब भी अदालतों में बैठे इनके वामपंथी साथी इन्हे झट से जमानत पर रिहा कर देंगे. सवाल ये भी है कि क्या गुजरात की जनता ऐसी भ्रष्ट और नीच पार्टी को वोट देकर फिर से सत्ता पर बैठायेगी?

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