मोदी राज में बीजेपी शासित राज्यों ने देशहित में लिया ज़बरदस्त फैसला, कांग्रेस मे मचा हंगामा

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नई दिल्ली : आज कल देश में लोगों के अंदर से देशभक्ति की भावना बिलकुल ही ख़त्म होती जा रही है. कभी किसी को यूनिवर्सिटी में टैंक रखने से तकलीफ है, तो किसी को राष्ट्रिय ध्वज फैराने से तकलीफ, तो सड़कों पर छात्र भारत तेरे टुकड़े होंगे इन्शाहाल्लाह!” ऐसे नारे लगा रहे हैं.

राष्ट्रगान के लिए 52 सेकंड खड़े होने में इनके सीने में जलन मचने लगती हैं. लेकिन यहाँ भी एक उम्मीद की किरण जगी है, भाजपा सरकार में नगर निगम ने बेहद शानदार फैसला लिया है, जिसे देख कुछ लोगों की छाती पर सांप लोटने वाले हैं.

भाजपा राज्यों ने सुनाया शानदार फैसला, मची वामपंथियों में चीखपुकार !

अभी-अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक गुवाहाटी नगर निगम के कर्मचारियों ने खुद फैसला लिया है कि वे हर रोज़ सुबह काम शुरू करने से सबसे पहले राष्ट्रगान गाएंगे. गुवाहटी के महापौर मृगेन सारानिया ने कहा कि देश के प्रति नागरिकों के भी कुछ कर्तव्य हैं और देश के प्रति लोगों में सम्मान पैदा करें, इसलिए देश के प्रति प्रेम जताने के लिए यह फैसला लिया गया है. जब सड़कों पर देश विरोधी नारे लग सकते हैं तो देशभक्ति क्यों नहीं की जा सकती.

देश के अन्य राज्यों ने भी मुहीम शुरू करी !

दरअसल यह शानदार सुबह राष्ट्र्गान गाने की मुहीम सबसे पहले जयपुर नगर निगम ने शुरू करी थी. फिर यह मुहिम पूरे देश में फैल गई और धीरे-धीरे कई प्रदेशों के नगर निगमों ने जयपुर का अनुसरण करते हुए राष्ट्रगान गाने का चलन शुरू किया. जयपुर नगर निगम देश का ऐसा पहला सरकारी कार्यालय बना जहां कर्मचारियों द्वारा ऑफिस में घुसने से पहले और शाम निकलने से पहले राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाने का आदेश का पालन होना शुरू हुआ.

जिसे फैसला नहीं पसंद वो पाकिस्तान चला जाय

जयपुर के मेयर अशोक लाहोटी ने संवाददाताओं को बताया, “मुझे लगता है कि इससे कर्मचारियों में सकारात्मक संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा पनपेगी और उनमें राष्ट्रभक्ति का भाव जगेगा.” उन्होंने कहा कि स्पीकर्स पर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत बजाया जाएगा और इसके लिए कर्मचारियों को एक ही स्थान पर एकत्र होने की जरूरत नहीं है.

लाहोटी ने कहा कि जो राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत नहीं गाना चाहता, वह पाकिस्तान जा सकता है. यह शानदार फैसला बा दूसरे राज्यों में भी फ़ैल रहा है, लोगों इसका दिल से पालन कर रहे हैं, अब दूसरे भाजपा राज्य भी इस फैसले को अपना रहे हैं.

कांग्रेस और वामपंथियों ने शुरू किया छाती पीटना

तो वहीँ कांग्रेस सरकार ने यहाँ भी अपना राजनितिक कटोरा बजाना शुरू कर दिया है. असम के विपक्षी दलों ने नगर निगम की इस पहल को राजनीति से प्रेरित बताया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के पीछे का मकसद देशभक्ति नहीं बल्कि राजनीति है.

कांग्रेस ने राष्ट्रभक्ति से पहले शहर-भक्ति की याद दिलाते हुए जरूरी कार्य पूरे करने की नसीहत दी है. कांग्रेस का मानना है सिर्फ राष्ट्रगान से देशभक्ति के जज्बे को नहीं नापा जा सकता. दिन में दो बार राष्ट्रगान की बात कहना, देशभक्ति नहीं बल्कि इसके नाम पर दिखावा है.

तो वहीँ अभी सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने साल 2016 के उस फैसले को पलट दिया जिसमें खुद कोर्ट ने कहा था कि हर सिनेमाघरों में पिक्चर दिखने से पहले राष्ट्रगान गाना अनिवार्य होगा. लेकिन अब 2017 में जज खुद कह रहे हैं कि लोग वहां मनोरंजन करने जाते है, राष्ट्रभक्ति ऐसे थोपी नहीं जा सकती. जबकि अभी सोशल मीडिया पर कुछ तसवीरें वायरल हुई थी जहाँ लोग एप्पल के नए आईफोन को लेने के लिए लम्बी लाइन में घंटे खड़े हुए थे.

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