मोदीराज में भ्रष्टाचारी व् घूसखोर जजों के खिलाफ सख्त एक्शन, हिल गयी पूरी न्यायपालिका, राष्ट्रपति कोविंद ने कहा..

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पिछले काफी वक़्त से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार होने की बात सामने आती रही है. कई भ्रष्टाचारी जज, भ्रष्टाचारियों व् अपराधियों के साथ सेटिंग करके मामले रफा-दफा करवा देते हैं, ये बात किसी से छिपी हुई नहीं है.

यहाँ तक कि अभी कुछ ही वक़्त पहले खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी न्यायपालिका को फटकार लगाते हुए अपने दामन को साफ़ रखने के निर्देश दिए थे. अब इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त एक्शन लिया है.

भ्रष्टाचार के आरोप दो जज ससपेंड

दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी कार्रवाई की है. हाई कोर्ट ने दिल्ली की एक निचली अदालत के दो जजों को भ्रष्टाचार के आरोप में लिप्त पाते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है. बताया जा रहा है कि ये दोनों जज दिल्ली की द्वारका जिला अदालत में कार्यरत थे.

द्वारका कोर्ट के अतिरिक्त जिला जज जितेंद्र मिश्रा और विशेष जज नवीन अरोड़ा पर भ्रष्टाचार व् घूसखोरी के आरोप लगे हैं. इनमें से एक जज पर आरोप है कि जज साहब आरोपी की मदद करने के एवज में उसके पैसों पर विदेश घूम आये. वहीँ दूसरे जज पर केस रफा-दफा करने के लिए आरोपी से पैसे मांगने का आरोप है.

जिन सबूतों के आधार पर दोनों जजों पर आरोप लगे हैं, वो भी दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पेश किए जा चुके हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के इन आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया और केस के आरोपी से मिलीभगत कर आर्थिक लाभ उठाने और पैसे लेने वाले दोनों जजों को सस्पेंड कर दिया.

भ्रष्टाचारी जज दिलाएंगे न्याय?

वैसे यदि पिछले काफी वक़्त से न्यायपालिका द्वारा लिए जा रहे फैसलों पर गौर किया जाए तो समझ आता है कि दूसरों को न्याय देने वाले न्यायाधीश महोदय तो खुद ही भ्रष्टाचार के दलदल में गोते लगाते हैं.

हाल ही में जिस तरह से 2जी घोटाले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया, अशोक चव्हाण पर केस चलाने की मंजूरी को खारिज कर दिया गया. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पी चिदंबरम, उसका बेटा कार्ति चिदंबरम आराम से मौज कर रहे हैं.

वहीँ अदालतें दिवाली पर पटाखे बैन करने में व्यस्त हैं, उनका ध्यान इस और ज्यादा है कि तमिलनाडु में बैलों की दौड़ ना हो, दही-हांडी की ऊंचाई कितनी होनी चाहिए और किस उम्र के लड़कों को इस खेल में भाग लेना चाहिए. कश्मीरी पंडित मारे-मारे फिर रहे हैं तो कोई बात नहीं मगर अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों के मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए.

कोलेजियम सिस्टम की रक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक अड़ा हुआ है. जजों की नियुक्ति कैसे होती है, ये तो कोंग्रेसी नेता और जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी के सेक्स स्कैंडल से सामने आ ही चुका है. बहरहाल दिल्ली हाई कोर्ट की इस कार्रवाई का कुछ तो असर पडेगा, शायद न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कुछ कम हो पाए.

ये विडियो देखें :

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