32 साल पहले निभाया था भगवान राम का किरदार, आज इन्हें देखकर यकीन नहीं करेंगे आप..

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हिंदी टेलीविजन के इतिहास में जब भी किसी खास टीवी सीरीज की बात की जाती है तो रामानंद सागर की ‘रामायण’ का नाम उस लिस्ट में सबसे पहले आता है. 1987 में टीवी पर प्रसारित होने वाले रामानंद सागर के शो ‘रामायण’ में उस दौरान हर एक किरदार हिट रहा.

इस शो के कई कलाकार आज भी टेलीविजन की दुनिया में किसी न किसी सीरियल में नजर आ जाते हैं . लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे है टीवी शो रामायण में भगवान राम की सशक्त भूमिका से करोड़ों दिलों में अमिट छाप छोड़ चुके अरुण गोविल के बारे में जो सालो बाद दिखने लगे है कुछ ऐसे.

अरुण आज 60 साल के हो गये है पर रामायण में श्रीराम का किरदार निभा कर अमर हो गये अरुण सालो से टीवी इंडस्ट्री से गायब है . अरुण का जन्म 12 जनवरी 1958 को मेरठ में हुआ था. गोविल पिछले कई सालों से एक्टिंग से दूर हैं .

उन्होंने कहा कि राम के अभिनय से जो प्रसिद्धि मिली, उसके बराबर दोबारा कोई इस स्तर का काम ही सामने नहीं आया .गोविल इस समय सिर्फ प्रोडक्शन पर ध्यान दे रहे हैं वही उनकी अपनी एक टीवी कंपनी है .

अरुण में अपने फिल्मी करियर की शुरआत साल 1977 में आई फिल्म ” पहेली ” की थी इसके बाद उन्होंने ‘सावन को आने दो, सांच को आंच नहीं, और ‘इतनी सी बात, ‘हिम्मतवाला, ‘दिलवाला, ‘हथकड़ी और ‘लव कुश जैसी कई बॉलीवुड फिल्मों में अहम भूमिका निभाई है . गाोविल ने ‘कैसे कहूं, ‘बुद्धा, ‘अपराजिता, ‘वो हुए न हमारे और ‘प्यार की कश्ती में जैसे कई पॉपुलर टीवी सीरियल्स में भी अभिनय किया है .

अरुण ने बताया की रामानंद सागर ने मुझे सबसे पहले सीरियल ‘विक्रम और बेताल में राजा विक्रमादित्य का रोल दिया था इसकी सफलता के बाद 1987 में ‘रामायण में भगवान राम का रोल मिला जिसने मझे हर घर में एक अलग पहचान दिलाई.

अरुण गोविल का मानना है कि कलाकार कभी किरदार से बड़ा नहीं होता, लेकिन जो पात्र के किरदार पर हूबहू खरा उतरे वही सच्चा कलाकार है . अरुण के चेहरे में सालो बाद भी वही सादगी है जो हम उन्हें रामायण में राम के किरदार में सालो पहले देखते थे.

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