उन्नाव गैंगरेप – CBI जांच में आया बेहद चौंकाने वाला मोड़, मुकर गयी पीड़िता, जांच अधिकारी भी रह गए हैरान

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उन्नाव का गैंगरेप केस पिछले काफी वक़्त से चर्चा में है. इसे लेकर देश के अंदर काफी गुस्सा भी है. सीएम योगी ने जांच सीबीआई को सौंप दी है और बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. मगर अभी-अभी एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया है.

पीड़ित पक्ष का नार्को टेस्ट कराने से इंकार, विधायक तैयार

दरअसल विधायक पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी अपने परिवार के सदस्यों के साथ लखनऊ में सीबीआई के आफिस आ गई है. सीबीआई की टीम ने लखनऊ के लोहिया अस्पताल में उसका मेडिकल भी कराया. मगर पीड़ित पक्ष ने (झूठ पकड़ने वाला टेस्ट) नार्को टेस्ट कराने से इंकार कर दिया है.

दरअसल जांच में सत्यता का पता लगाने के लिए नार्को टेस्ट का सहारा लिया जाता है. मगर पीड़िता ने नार्को टेस्ट के लिए इंकार कर दिया है. इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर अपना नार्को टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं.

नार्को टेस्ट क्यों इंकार कर रहे हैं पीड़ित?

बता दें कि आरोपी विधायक की पत्नी पहले भी उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से मिलकर अपने पति तथा पीड़ित युवती का नार्को टेस्ट कराने की मांग कर चुकी हैं. हाल ही में विधायक कुलदीप सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर ने पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह से मुलाकात की थी और मांग की थी कि उसके विधायक पति और लडकी एवं उसके चाचा का नार्को टेस्ट कराया जाए.

विधायक की पत्नी का कहना है कि इससे सच्चाई का पता लग सकेगा और सही तस्वीर सामने आएगी. उनके मुताबिक़ राजनीतिक वजह के कारण उनके पति को मोहरा बनाया जा रहा है. वहीँ पीड़ित पक्ष नार्को टेस्ट के लिए तैयार नहीं है और बिना टेस्ट के ही अपनी बात मनवाना चाह रहा है.

क्या होता है नार्को टेस्ट?

बता दें कि ट्रुथ सीरम या नार्को टेस्ट का इस्तेमाल अपराधियों व् आरोपियों से सच उगलवाने के लिए किया जाता है. इसमें आरोपी को एक दवा (जैसे सोडियम पेंटाथॉल) दी जाती है. इससे अभियुक्त बेहोशी की हालत में बात करता है और सच बातें उगल देता है.

क्या कहना है पीड़िता का?

पीडि़ता ने कहा है कि, “पीएम नरेंद्र मोदी ने इस घटना को संज्ञान में लिया है. हमें उम्मीद है कि अब हमें न्याय जरुर मिलेगा.” इससे पहले लखनऊ रवाना होने से पहले पीडि़ता के चाचा ने कहा कि वह आरोपी विधायक की गिरफ्तारी से खुश हैं. साथ ही उन्होंने सीबीआई और मीडिया का शुक्रिया अदा किया. पीडि़ता के चाचा ने बड़ा आरोप लगाया कि पूरा उन्नाव प्रशासन आरोपी विधायक को बचाने में लगा हुआ था.

विधायक सेंगर के बारे में पीड़िता ने कहा, ‘4 जून को उसने (सेंगर ने) जो किया उसके बाद मेरे पापा और मैं डर की वजह से दिल्ली में रहने को मजबूर हो गए थे. उन्होंने माखी आने का फैसला किया क्योंकि मेरे पांच साल के भाई को एक साइकल चाहिए थी.’ उसने कहा, ‘3 अप्रैल को जब मेरे पिता को मारा-पीटा गया तो विधायक ने मेरे चाचा से कहा कि मैंने उसे प्रसाद दे दिया पब्लिक में बोलने का.

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