सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सामने आया अमित शाह का प्लान सी, कांग्रेस-जेडीएस के 10 विधायकों से मिलकर चटाई राहुल को धूल

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बंगलुरु : बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने के लिए कांग्रेस और जेडीएस अपने स्तर पर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. बीजेपी की पहुंच से अपने विधायकों को दूर करने के लिए कांग्रेस-जेडीएस ने अपने विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट कर दिया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सीएम येदियुरप्पा को कल शाम 4 बजे बहुमत परीक्षण का आदेश दिया है.

अमित शाह का प्लान सी

कांग्रेस इस फैसले से काफी खुश नज़र आ रही है. अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक आंतरिक आदेश तक कहा है. सूत्रों के मुताबिक़ बीजेपी अब मोटा भाई अमित शाह के प्लान सी पर काम कर रही है. बताया जा रहा है कि बीजेपी फ्लोर टेस्ट के लिए मोर्चाबंदी कर रही है.

बता दें कि मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने शपथ लेने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस और जेडी (एस) के सदस्यों से अपने विवेक के अनुसार वोट करने की अपील की थी. जानकारी के मुताबिक़ कांग्रेस के कई विधायक सिद्धारमैया से नाराज हैं और जेडीएस के साथ गठबंधन से भी नाखुश हैं. दोनों दलों में असंतोष सुलग रहा है.

10 विधायक वोटिंग से रहेंगे दूर

लिंगायत समुदाय से आने वाले 16 विधायक पार्टी से नाराज चल रहे हैं. ये विधायक लिंगायत समुदाय के येदियुरप्पा की जगह वोक्कालिगा समुदाय के एचडी कुमारस्वामी को सीएम बनाये जाने के फैसले के खिलाफ हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी ने इन नाराज विधायकों से संपर्क किया है और विश्वास मत वाले दिन कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों का एक भरोसेमंद हिस्सा वोटिंग से दूर रहेगा.

संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक विश्वासमत हासिल करने के लिए हॉफ मार्क से एक सीट ज्यादा होनी चाहिए. बताया जा रहा है कि 10 विधायकों ने बीजेपी से विश्वास मत के दौरान मौजूद नहीं रहने का वादा किया है. अमित शाह की रणनीति के मुताबिक़ इन विधायकों के वोटिंग से दूर रहने से कर्नाटक विधानसभा में विधायकों की संख्या 222 की जगह केवल 212 रह जायेगी.

सदन में बहुमत साबित करेंगे येदियुरप्पा

इस संख्या के मुताबिक हाफ मार्क 106 होगी. विश्वासमत के लिए 107 विधायकों की जरूरत है. बीजेपी के पास विधायकों की संख्या 104 है और तीन विधायकों ने बीजेपी को समर्थन दे दिया है. ऐसे में बीजेपी के लिए विश्वास मत हासिल करना आसान हो जाएगा और गोवा, मेघालय की तरह कल फिर से कांग्रेस को मुँह की खानी पड़ेगी.

दरअसल बीजेपी किसी भी हाल में कांग्रेस को सत्ता से दूर रखना चाहती है क्योकि कांग्रेस की सत्ता में हिंदूवादी संगठनों के लोगों के कत्लेआम की ख़बरें आती रही हैं. भ्रष्टाचार से कर्नाटक का विकास रुका हुआ है. केंद्र की योजनाओं का पूरा फायदा जनता तक नहीं पहुंच रहा. ऐसे में जरूरी है कि कांग्रेस को सत्ता तक ना पहुंचने दिया जाए.

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