अमित शाह ने ओडिशा में ऐसा कर विपक्ष को भी मजबूर कर दिया ऐसा कुछ कहने के लिए जो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा…

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अपने को दलितों का मसीहा बतानेवाली कांग्रेस का दलितों के प्रति सौतेला व्यवहार तो समय-समय पर उभरकर सामने आता रहता है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस जिस भाजपा को दलित विरोधी बताकर अपने निशाने पर लेती रहती है उसके नेता हमेशा से दलितों के प्रति प्रेम और समर्पण का अपना भाव प्रदर्शित करते रहते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने तो कई बार मंच से और कई अन्य जगहों पर इसकी मिसाल पेश की है। छत्तीसगढ़ में तो एक दलित महिला को मोदी ने मंच पर झूककर प्रणाम तक कर लिया था। जिसे पूरी दुनिया ने देखा। वह महिला थी कुंवर बाई जिनका हाल ही में निधन हुआ है।

वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी कई बार दलितों के परिवार के बीच हीं नहीं पहुंचे उन्होंने देश के कई राज्यों में जनसंपर्क के दौरान अपने दलित कार्यकर्ता के घर में रूककर खाना भी खाया है। ऐसा नहीं है कि अमित शाह ने ऐसा पहली बार किया है या उनका और उनकी पार्टी का दलित प्रेम दिखावा भर है। उन्होंने देश के लगभग हर राज्य में जहां वह कैंपेन के लिए गए वहां अपनी पार्टी के दलित कार्यकर्ता के घर में रूककर खाना खाया है।

इसी क्रम को जारी रखते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने दो दिवसीय ओडि़शा दौरे के दुसरे दिन बलांगीर जिला अन्तर्गत देवगांव में एक दलित परिवार के घर पारंपरिक ओडि़आ भोजन किया। शाह के साथ दो केन्द्रीय मंत्रियों ने भी भोजन किया है।

दलित परिवार ने पारंपरिक ओडि़आ खाना चावल, मुंगदाल, नींब फुल की भजिया, खीर, सब्जी, साग, भजिया, रोटी आदि बनाया। खाद्य की जांच परीक्षण करने के बाद अमित शाह ने जमीन पर बैठकर यहां पर भोजन किया।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को एक जनसभा को भी संबोधित किया इस दौरान उन्होेंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा और नौकरियों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिये आरक्षण की नीति को न तो रद्द करेगी और न ही किसी को ऐसा करने देगी।

जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, आरक्षण नीति को कोई भी बदलने की हिम्मत नहीं कर सकता जैसा कि संविधान में बी आर अंबेडकर ने तय किया है। विभिन्न दलित संगठनों द्वारा एससी-एसटी ( अत्याचार निवारण) अधिनियम को कथित रूप से कमजोर करने के खिलाफ आयोजित राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान हुई हिंसा में करीब एक दर्जन लोगों की मौत के लिए शाह ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया।

 

उन्होंने कहा, बंद का आह्वान क्यों किया गया जब प्रधानमंत्री ने लोगों को आश्वासन दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। बंद के दौरान दस लोग मारे गए। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल इन दस लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं।

मीडिया और सोशल मीडिया में बीजेपी के आरक्षण वापस लेने संबंधी भ्रामक प्रचार अभियान चला जाने का आरोप लगाते हुए शाह ने कहा मैं इस जनसभा में इतने लोगों की उपस्थिति में यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि बीजेपी आरक्षण वापस नहीं लेने जा रही और न ही वह किसी को ऐसा करने की इजाजत देगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्धृत करते हुये बीजेपी अध्यक्ष ने कहा भारत के संविधान में हमारा पूर्ण विश्वास है। बी आर अंबेडकर द्वारा संविधान में तय आरक्षण नीति में जरा सा भी बदलाव नहीं होगा। कोई इसे बदलने की हिम्मत नहीं कर सकता। बीजेपी किसी को आरक्षण नीति में बदलाव की इजाजत भी नहीं देगी।

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